पद्मपुराण में एक ऐसे व्रत का उल्लेख किया गया है जिससे प्रेत योनी में गया व्यक्ति भी मुक्ति प्राप्त कर सकता है। अगर अपने जीवन काल में मनुष्य इस व्रत को करता रहे तो उसे प्रेत योनी में जाने का कष्ट नहीं उठाना पड़ता है। इस व्रत का नाम है अचला एकादशी।
ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष में आने वाली इस एकादशी को अपरा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस एकादशी के दिन भगवान श्री कृष्ण के साथ बलदेव जी की पूजा करने का भी विधान है।
शास्त्रों में कहा गया है कि जो भी व्यक्ति इस दिन व्रत रखकर कृष्ण और बलदेव जी की पूजा करता है उसे अपने जीवन काल में किए कई भयंकर पापों से भी मुक्ति मिल जाती है।