कंस की जेल में बंद वसुदेव और देवकी ने कुल नौ संतानों को जन्म दिया।
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Krishna Janmashtami 2022: भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। वृंदावन समेत भगवान कृष्ण के तमाम मंदिरों में साज सज्जा,रंग रोगन का काम शुरू हो गया है,वहीं ठाकुर जी के नए वस्त्रों की सिलाई व उसमें जरी का काम हो रहा है। वृंदावन में 19 अगस्त को ठाकुर जी का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। यहां यह बताना जरूरी है कि भगवान कृष्ण राजकुमार वसुदेव और देवकी के आठवें पुत्र हैं। भगवान कृष्ण के छह भाइयों को तो कंस ने पैदा होते ही मार दिया था। आज हम यहां उन्हीं भाइयों की चर्चा करेंगे।
यदुवंश में महाराजा उग्रसेन के एक छोटे भाई देवक थे। कंस तो महाराजा उग्रसेन का बेटा था,वहीं देवक की पुत्री देवकी थीं। कंस अपनी चचेरी बहन राजकुमारी देवकी को बहुत प्यार करता था। उसने खुद देवकी की शादी बड़े धूमधाम से यादव राजकुमार वसुदेव के साथ की। शादी के बाद विदाई के वक्त वह अपनी बहन को ससुराल पहुंचाने के लिए खुद रथ हांक कर चला,लेकिन अभी महल से बाहर ही निकला था कि आकाशवाणी हो गई। इसमें कहा गया कि जिस बहन को इतने प्यार से वह विदा कर रहा है,उसी बहन के आठवें पुत्र द्वारा उसकी हत्या हो जाएगी। आकाशवाणी सुनकर कंस इतना डर गया कि वह तत्काल वसुदेव और देवकी को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया। वहीं उसने तय कर लिया कि वसुदेव देवकी के सभी पुत्रों को वह जन्म लेते ही मार डालेगा। इससे वह अजर और अमर हो जाएगा।
देवकी ने नौ बच्चों को जन्म दिया
कंस की जेल में बंद वसुदेव और देवकी ने कुल नौ संतानों को जन्म दिया। इनमें सात बच्चों का जन्म तो कारागार में ही हुआ। इनमें से छह बच्चों को कीर्तिमान,सुषेण,भद्रसेन,ऋृजु,सम्मार्दन और भद्र को तो कंस ने पैदा होते ही पत्थर पर पटक कर मार दिया। वहीं सातवें गर्भ का अदला-बदला हुआ था। यह बच्चा गोकुल में रह रही वसुदेव की पहली पत्नी रोहिणी के गर्भ से पैदा हुआ। गर्भ संकर्षण की वजह से ही इस बच्चे का नाम संकर्षण रखा गया,जिन्हें बलदाऊ या बलराम भी कहा जाता है। वहीं भगवान कृष्ण आठवीं संतान के रूप में खुद कारागार के अंदर देवकी के गर्भ से उत्पन्न हुए। नौंवी संतान देवकी के कंस की जेल से बाहर आने के बाद हुई। यह संतान कन्या थी। जिसे सुभद्रा कहा गया।