Krishna Arjun Geeta Updesh in Hindi: कुरुक्षेत्र के मैदान में जब भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को गीता का ज्ञान दे रहे थे तो वो पल पूरी सृष्टि के लिए अदृश्य था। बावजूद इसके अर्जुन के अलावा तीन अन्य लोगों ने भगवान के श्रीमुख से गीता के उपदेशों को ग्रहण किया था। इनमें एक तो हस्तिनापुर नरेश धृतराष्ट्र के सारथी संजय थे। संजय ने भगवान वेद व्यास से मिली दिव्य दृष्टि के दम पर हस्तिनापुर में ही बैठकर कुरुक्षेत्र में घटित हो रहे एक एक पल के गवाह बने थे। उन्होंने भगवान कृष्ण के वचनों को सुनकर महाराज धृतराष्ट्र को सुनाया था। इसी प्रकार बजरंग बली उस समय अर्जुन के रथ की ध्वजा पर बैठे थे। उन्होंने भी यह प्रसंग अपनी आंखों से देखा और अपने कानों से सुना था। इसी प्रकार तीसरे व्यक्ति भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक थे। महाभारत युद्ध से पहले ही भगवान कृष्ण ने उनका धड़ अपने सुदर्शन चक्र से काट कर उनके सिर को दूर एक पहाड़ी पर स्थापित कर दिया था।
गीता ज्ञान
- गीता पढ़ने वाले व्यक्ति को सच और झूठ, ईश्वर और जीव का ज्ञान हो जाता है। उसे अच्छे और बुरे की समझ आ जाती है।
- गीता पढ़ने से व्यक्ति का आत्मबल बढ़ता है और व्यक्ति साहसी और निडर बनकर अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ता है।
- रोजाना गीता पढ़ने से शरीर और दिमाग में सकारात्मक ऊर्जा विकसित होती है। ऐसे व्यक्ति को भूत पिशाच आदि का भय नहीं रहता।
- जो व्यक्ति नियमित गीता पढता है, उसका मन शांत बना रहता है। वह विपरीत परिस्थिति में भी अपने मन वह वचनों पर नियंत्रण पा लेता है।
- गीता का अध्ययन कने वाला व्यक्ति धीरे धीरे कामवासना,क्रोध,लालच और मोह माया के बंधनों से मुक्त हो जाता है। ऐसे बंधन उसे और उसके जीवन में कभी रुकावट नहीं बन पाते।
- गीता पढ़ने वाला व्यक्ति पूर्ण रूप से अपने मन में नियंत्रण पा लेता है। वह जैसे चाहे अपने मन को कार्य में ले सकता है।
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