सोमनाथ मंदिर
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शिवलिंग की पूजा से दूर हुआ था चंद्रदेव का रोग
चन्द्रमा ने छः महीने तक स्थिर चित्त से खड़े रहकर भगवान शिव के मृत्युंजय स्वरुप का ध्यान करते हुए दस करोड़ मृत्युंजय मन्त्र का जप किया। तब भगवान ने प्रसन्न होकर दर्शन दिए और चन्द्रमा को अमृत्व प्रदान करते हुए मास-मास में पूर्ण एवं क्षीण होने का वर दिया। इस प्रकार भगवान आशुतोष सदाशिव की कृपा से चन्द्रमा रोगमुक्त हो गए और दक्ष के वचन की भी रक्षा हो गई। तदन्तर चन्द्रमा एवं अन्य देवताओं के प्रार्थना करने पर भगवान शंकर उन्ही के नाम से ज्योतिर्लिंग के रूप में पार्वती सहित वहां स्थित हो गए और सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के नाम से तीनों लोकों में विख्यात हुए।
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