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Kumbh Mela 2019 : नागाओं की रहस्मयी दुनिया का वो सच, जिससे अभी तक सभी थे अनजान

Wed, 26 Dec 2018 11:21 AM IST
Ayush Jha मधुकर मिश्र, अमर उजाला
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Naga Sadhu
भारत के चार प्रमुख तीर्थ स्थानों — प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक और उज्जैन में 12 साल के अंतराल में कुंभ मेले का आयोजन होता है। आस्था से जुड़े इस कुंभ मेले में नागा साधु सभी के आकर्षण का केंद्र होते हैं। संन्यास परंपरा से आने वाले नागा साधू कहां से आते हैं और कुंभ खत्म होते ही कहां चले जाते हैं, इसे लेकर अक्सर हमारे मन में सवाल उठता रहता है। नागा साधुओं की रहस्मयी दुनिया के बारे में जानने के लिए आगे की स्लाइड क्लिक करें —
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Naga Sadhu
कुंभ मेले बड़ी संख्या में आने वाले साधु के आने और जाने का शायद ही किसी को पता चलता है। कहते हैं कि नागा साधु कभी भी आम मार्ग से नहीं जाते, बल्कि देर रात घने जंगल, आदि के रास्ते से अपनी यात्रा करते हैं।
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कुंभ मेला 2019
दीन-दुनिया से अमूमन दूर तप-साधना में लीन रहने वाले नागा साधुओं के बारे में माना जाता है कि एक आम आदमी के मुकाबले कहीं ज्यादा कठिन जीवन होता है।

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Naga Sadhu
संतों के 13 अखाड़ों में से सिर्फ सात संन्यासी अखाड़े ही नागा साधु बनाते हैं। इनमें जूना, महानिर्वाणी, निरंजनी, अटल, अग्नि, आनंद और आवाहन अखाड़ा शामिल हैं।
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Naga Sadhu
नागा साधुओं को दीक्षा के बाद उनकी वरीयता के आधार पर पद दिए जाते हैं। जैसे — कोतवाल, बड़ा कोतवाल, महंत, सचिव आदि।
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Naga Sadhu
नागा साधुओं के अखाड़े से जुड़ा कोतवाल अखाड़े और नागा साधुओं के बीच सेतु का कार्य करता है। सुदूर जंगल, कंदराओं आदि में रहने वाले इन नागा साधुओं को कुंभ में बुलाने का कार्य हो या फिर कोई सूचना पहुंचाने का काम, यही कोतवाल करते हैं।
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Naga Sadhu
आम आदमी की तरह नागा साधु भी श्रृंगार करते हैं। सूर्योदय से पूर्व उठ जाने के बाद नित्यक्रिया और स्नान के बाद नागा साधु अपना श्रृंगार करते हैं। भभूत, रुद्राक्ष, कुंडल आदि से श्रृंगार करने वाले नागा साधु अपने साथ त्रिशूल, डमरू, तलवार, चिमटा, चिलम आदि साथ रखते हैं।

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Naga Sadhu
माना जाता है कि संन्यासी अखाड़ों से जुड़े अधिकांश नागा साधु आम आदमी से दूर हिमालय की चोटियों, गुफाओं, अखाड़ों के मुख्यालय, और मंदिर आदि में अपनी धूनी जमाकर साधनारत रहते हैं, लेकिन ये कभी भी एक स्थान पर लंबे समय तक नहीं टिकते हैं और पैदल ही भ्रमण करते हैं।

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जूना अखाड़ा - फोटो : अमर उजाला
अपने अखाड़े से जुड़े देवता की साधना और ध्यान करने वाले ये नागा साधु तमाम तरह की यौगिक क्रियाएं करते हैं। शैव परंपरा से जुड़े नागा साधु ध्यान—साधना के अलावा अपने गुरु की विशेष रूप से सेवा करते हैं।
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- फोटो : bbc
नागा साधुओं को शंकराचार्य की सेना कहा जाता है। सनातन परंपरा के प्रतीक माने जाने वाले इन अखाड़ों और इनसे जुड़े नागा साधुओं का वैभव कुंभ और महाकुंभ में ही देखने को मिलता है।
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