फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शिव मंदिर में तीन बार ताली बजाने का पौराणिक और धार्मिक महत्व

Thu, 27 Feb 2025 04:57 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

क्या आप जानत हैं शिव मंदिर में तीन बार ताली क्यों बजाई जाती है और इसका आध्यात्मिक महत्व क्या है ?
विज्ञापन
भगवान शिव के मंत्र - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा विशेष विधि-विधान से की जाती है। मंदिर में प्रवेश करने से लेकर आरती, अभिषेक और प्रसाद चढ़ाने तक हर काम के पीछे एक गूढ़ आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व होता है। ऐसी ही एक परंपरा है शिव मंदिर में तीन बार ताली बजाने की है जिसे धार्मिक आस्था और पौराणिक मान्यताओं से जोड़ा जाता है। आइए जानते हैं कि शिव मंदिर में तीन बार ताली क्यों बजाई जाती है और इसका आध्यात्मिक महत्व क्या है।

विज्ञापन


1. पौराणिक मान्यता: त्रिदेवों का आह्वान
पौराणिक कथाओं के अनुसार, ताली बजाने की परंपरा ब्रह्मा, विष्णु और महेश के आह्वान से जुड़ी हुई है। जब भक्त शिव मंदिर में प्रवेश करते हैं और तीन बार ताली बजाते हैं, तो यह तीनों लोकों (भूलोक, पाताल और स्वर्गलोक) तथा तीनों प्रमुख देवताओं (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) को नमन करने का प्रतीक माना जाता है। भगवान शिव साक्षात परम तत्त्व हैं, और तीन बार ताली बजाने से उनके त्रिगुणात्मक स्वरूप – सतोगुण (ब्रह्मा), रजोगुण (विष्णु) और तमोगुण (शिव) की उपासना की जाती है। इससे साधक को शिव की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है।

Career Remedies: करियर में सफलता पाने के लिए भगवान गणेश के इन मंत्रों का करें जाप
विज्ञापन


2. नकारात्मक ऊर्जा का नाश
शास्त्रों में ध्वनि (नाद) को अत्यंत शक्तिशाली माना गया है। मंदिर में प्रवेश करने से पहले तीन बार ताली बजाने से चारों ओर एक विशेष प्रकार की ध्वनि उत्पन्न होती है, जिससे नकारात्मक शक्तियाँ और आसुरी ऊर्जा दूर हो जाती हैं। ताली बजाने से वातावरण में कंपन उत्पन्न होता है, जिससे मंदिर परिसर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह प्रक्रिया वातावरण को शुद्ध और भक्त के चित्त को शांत करने में सहायक होती है।
विज्ञापन


Kharmas 2025: 14 या 15 मार्च कब से लगेगा खरमास ? जानें सही डेट और समापन की तिथि

3. पंचतत्वों का जागरण
शरीर और ब्रह्मांड पंचतत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) से बने हैं। जब हम ताली बजाते हैं, तो यह पंचतत्वों को सक्रिय करने का कार्य करती है।

पहली ताली – पृथ्वी और जल तत्व को जागृत करती है, जिससे शरीर में स्थिरता और शुद्धता आती है।
दूसरी ताली – अग्नि और वायु तत्व को सक्रिय करती है, जिससे ऊर्जा और चेतना जागृत होती है।
तीसरी ताली – आकाश तत्व को जागृत करती है, जिससे आध्यात्मिक उन्नति होती है और भक्त का ध्यान भगवान शिव में केंद्रित होता है।

4. भगवान शिव को जगाने की परंपरा
कुछ मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ध्यानस्थ रहते हैं और गहन समाधि में लीन होते हैं। जब भक्त मंदिर में प्रवेश करने से पहले तीन बार ताली बजाते हैं, तो इसे भगवान शिव को जगाने और उनकी कृपा प्राप्त करने का संकेत माना जाता है। त्रिशूलधारी भगवान शिव को जागृत करने की यह प्रथा विशेष रूप से दक्षिण भारत और तांत्रिक परंपराओं में प्रचलित है, जहां यह विश्वास किया जाता है कि ताली बजाने से शिव की दैवीय ऊर्जा भक्त के साथ त्वरित संपर्क में आती है। अतः जब भी आप शिव मंदिर जाएं, इस परंपरा को समझकर श्रद्धा भाव से तीन बार ताली बजाएं और भगवान शिव की कृपा प्राप्त करें।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें