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गणपति के इस मंदिर में कुंवारी कन्याओं को मिलता है मनचाहा वर

Mon, 07 Sep 2020 08:23 PM IST
रुस्तम राणा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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गणेश भगवान - फोटो : अमर उजाला
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मनचाहा वर की कामना के लिए लड़कियां भगवान शिव-पार्वती की पूजा करती हैं। वे सोलह सोमवार के व्रत करती हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि गणपति महाराज का एक ऐसा मंदिर है जिसके दर्शन मात्र से लड़कियों को मनचाहा वर मिलता है। यहां गणेश भगवान अपने भक्तों की सारी मुरादें पूरी करते हैं। गणपति का यह मंदिर अपने आप में ही विशेष है। आइए जानते हैं कहां पर स्थित है गणेश भगवान का यह मंदिर और क्या है इस मंदिर की विशेषता..

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भगवान गणेश - फोटो : सोशल मीडिया
मध्य प्रदेश में यहां स्थित है गणपति महाराज का यह मंदिर
शास्त्रों में गणपति महाराज को विघ्नहर्ता के नाम से जाना जाता है। फिर यह विघ्न किसी का भी हो गणपति महाराज को इसका फर्क नहीं पड़ता है और वे अपने भक्तों की सारी मुरादें पूरी कर देते हैं। दरअसल मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले की पोहरी तहसील में गणेश भगवान का ऐसा मंदिर है जहां कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर की अर्जियां लगाती हैं।

विघ्नहर्ता हैं गणेश महाराज - फोटो : Pixabay
यहां श्रीजी के नाम से पुकारे जाते हैं गणपति महाराज 
यह मंदिर दो सौ सालों से भी अधिक पुराना है। इस मंदिर का नाम भी इच्छापूर्ण गणेश जी है। यहां गणपति बप्पा को श्रीजी के नाम से उनके भक्त पुकारते हैं। श्रीजी के इस मंदिर में कन्याएं सुंदर और योग्य वर की इच्छा के लिए बप्पा का दर्शन करने आती हैं। वे गणेश महाराज के सामने अपनी इच्छा को व्यक्त करती हैं और फिर कुछ दिनों बाद इनकी इच्छा भी पूर्ण हो जाती है।

गणपति महाराज - फोटो : Pixabay
ये है मंदिर का इतिहास
इस मंदिर को सिंधिया राजघराने की जागीरदारनी बालाबाई सीतोले ने साल 1737 में बनवाया था। इस मंदिर में जो गणपति महाराज की प्रतिमा रखी गई है। उसे स्वयं बालाबाई पुणे से लेकर आईं थीं। मंदिर में विघ्नहर्ता की प्रतिमा को इस तरह स्थापित किया गया था कि भगवान के दर्शन खिड़की से होते थे।
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नारियल - फोटो : social media
यहां चढ़ता है ये फल
मंदिर को लेकर मान्यता ये है कि जो भी भक्त यहां एकबार गणपति बप्पा की प्रतिमा के दर्शन कर लेता है तो बप्पा स्वयं ही उस भक्त की मुराद को जानकर उसे पूर्ण कर देते हैं। कुंवारी लड़कियां अपनी मुराद पूरी करवाने के लिए यहां गणपति महाराज को श्रीफल अर्पित करती हैं। इसलिए यहां गणपति महाराज को श्रीजी कहा जाता है।
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