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अपने आप खुलता और बंद होता है श्रीकृष्ण का ये मंदिर, आज तक नहीं खुल पाया चमत्कार का ये रहस्य

Fri, 06 Dec 2019 06:55 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
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राधा-कृष्ण का चमत्कारिक मंदिर - फोटो : अमर उजाला
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भारत में कई ऐसे मंदिर हैं जो अनोखे और बेहद चमत्कारिक हैं। ऐसा ही एक मंदिर वृंदावन में भगवान श्रीकृष्ण का है। यह मंदिर निधिवन में है। भगवान श्रीकृष्ण का यह मंदिर इतना चमत्कारिक है जिसे जानकर आप हैरान हो जाएंगे। दरअसल यह अपने आप ही खुलता है और खुद ही बंद हो जाता है।
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द्वारकाधीश मंदिर में राधा-कृष्ण का किया गया शृंगार
मंदिर में शयन के लिए आते हैं भगवान श्रीकृष्ण
वहां के पुजारियों का मानना है कि इस मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण रोजाना शयन के लिए आते हैं। मंदिर में भगवान के शयन के लिए बकायदा बिस्तर लगाया जाता है। बिस्तर में साफ सुथरे गद्दे और चादर बिछायी जाती है। जब मंदिर खुलता है तो बिस्तर में पड़ी सलबटें ये बताती हैं कि यहां कोई सोने के लिए आया था।

इस्कॉन मंदिर में मनमोहक छवि में दर्शन देते राधा-कृष्ण। - फोटो : अमर उजाला
माखन मिश्री लगाते हैं भोग
मंदिर की दूसरी चमत्कारिक घटना ये है कि इस मंदिर में प्रतिदिन माखन-मिश्री का प्रसाद बांटा जाता है, वहीं जो प्रसाद बच जाता है। उसे मंदिर में ही रख दिया जाता है। लेकिन बचा हुआ प्रसाद सुबह तक समाप्त हो जाता है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण माखन मिश्री को चट कर जाते हैं।

राधा कृष्ण
मंदिर में संत हरिदास ने राधा-कृष्ण को साक्षात किया था प्रकट
मान्यता अनुसार इस मंदिर को तानसेन के गुरु संत हरिदास ने अपने भजन से राधा−कृष्ण के युग्म रूप को साक्षात प्रकट किया था। यहां कृष्ण और राधा विहार करने आते थे। यहीं पर स्वामीजी की समाधि भी बनी है। इस मंदिर में राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण के सोने की व्यवस्था की जाती है।

राधा कृष्ण
मंदिर से जुड़े हैं ये अन्य रहस्य
मंदिर के बारे में यह बताया जाता है कि यहां भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी रासलीला करते हैं। कहते हैं कि अगर कोई व्यक्ति रात में छिपकर राधा-कृष्ण की रास लीला को देखता है तो वह पागल हो जाता है। उसकी आंखों की रोशनी चली जाती हैं। इसलिए मंदिर के समीप घरों में खिड़कियां नहीं लगी हैं। लोग शाम की आरती के बाद मंदिर में नहीं जाते हैं।
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तुलसी - फोटो : Social media
मंदिर परिसर में तुलसी के दो पौधे हैं कहते हैं रात के समय ये पौधे राधा की गोपियां बन जाती हैं और उनके साथ नृत्य करती हैं। इस तुलसी का पत्ता भी कोई नहीं ले जाता है।
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