यह सम्पूर्ण सृष्टि भगवान विष्णु की शक्ति से ही संचालित होती है। इतना ही नहीं शिवजी ने श्रीविष्णु को जगत के पालनकर्ता के रूप में नियुक्त किया। तब से लेकर आज तक श्रीविष्णु सृष्टि के पालनकर्ता के रूप में सब प्राणियों की रक्षा करते हैं।
आदिकाल से ही चतुर्भुज रूप भगवान विष्णु सम्पूर्ण विश्व की सर्वोच्च शक्ति तथा नियन्ता के रूप में माने गए हैं। सर्वव्यापक ईश्वर ही श्री विष्णु हैं, वेदों में इनकी अनन्त महिमा का गान किया गया है। यह सम्पूर्ण सृष्टि भगवान विष्णु की शक्ति से ही संचालित होती है। इतना ही नहीं शिवजी ने श्रीविष्णु को जगत के पालनकर्ता के रूप में नियुक्त किया। तब से लेकर आज तक श्रीविष्णु सृष्टि के पालनकर्ता के रूप में सब प्राणियों की रक्षा करते हैं। ज्योतिष के अनुसार खरमास में नियमित रूप से ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि करें, इसके बाद भगवान विष्णु का केसर युक्त दूध से अभिषेक करें। इतना ही नहीं, तुलसी की माला से 11 बार भगवान विष्णु के मंत्र ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः’का जप करने से अनंत पुण्यों की प्राप्ति होती है।
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प्रधान पूजा के अधिकारी अथवा यज्ञ पुरुष
धर्मग्रंथों के अनुसार ब्राह्मणों ने जब प्रथम पूजा के अधिकारी चुनने के लिए त्रिदेवों की परीक्षा ली तो श्री विष्णु को महर्षि भृगु और उनकी सभा में इन्हें ही प्रथम पूजा का अधिकारी घोषित किया। कहा गया है कि-
' क्षमा बड़न को चाहिये, छोटन को उत्पात।
का रहीम हरी का घट्यो, जो भृगु मारी लात।'
अर्थात ऋषि भृगु ने भगवान विष्णु की परीक्षा लेने के लिए उनके वक्षस्थल पर ज़ोर से लात मारी। मगर क्षमावान भगवान ने नम्रतापूर्वक उनसे ही पूछा कि हे ब्राह्मण देव! आपके पैर में चोट तो नहीं लगी? क्योंकि मेरा वक्षस्थल तो वज्र से भी कठोर है और आपके पैर बहुत सुकोमल हैं। भगवान विष्णु की यह उदारता देखकर महर्षि भृगु रोते हुए क्षमा याचना करने लगे तभी से महर्षि भृगु की घोषणा के बाद श्रीविष्णु को प्रथम पूजा का अधिकारी घोषित किया गया।
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भगवान विष्णु की पूजा का फल
भगवान विष्णु ऐसे देव हैं जिनको बहुत दयालु बताया गया है और वे सभी प्राणियों पर अपनी कृपा दृष्टि रखते हैं। इनका पूजन करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होकर सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है। सच्चे मन से उपासना करने पर वे अपने भक्तों को आठ प्रकार की सिद्धियां तथा नौ प्रकार की निधियां प्रदान कर सकते हैं। योग्य संतान, सुख, समृद्धि, वैभव, धन और यश की प्राप्ति के लिए भगवान विष्णु का पूजन किया जाना चाहिए। इनकी पूजा करने से विष्णुप्रिया महालक्ष्मी की सदैव आपके ऊपर कृपा बनी रहेगी। जिन कुंवारी कन्याओं के विवाह मैं देर हो रही हो उन्हें भगवान विष्णु की आराधना करनी चाहिए।
इसलिए प्रिय हैं तिल
परमेश्वर श्री विष्णु के पसीने से तिल,कुश,कपास की उत्पत्ति हुई है इसलिए इन्हें बड़ा ही पवित्र माना गया है। खर मास में तिलदान करने से दु:स्वप्नों का नाश व विभिन्न रोगों से मुक्ति मिल जाती है।