14 मार्च से खरमास शुरू हो रहा है।
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Meen Sankranti 2025: वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य जब भी एक से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं तो उसे संक्रांति कहते हैं। सूर्य हर माह राशि परिवर्तन करते हैं और इसी क्रम में 14 मार्च 2025 को आत्मा के कारक ग्रह सूर्यदेव गुरु की राशि मीन में प्रवेश करेंगे। सूर्य जब मीन राशि गोचर करते हैं तो खरमास का महीना शुरू हो जाता है। आइए जानते हैं मीन संक्रांति का महत्व और इस दौरान क्या करें और क्या नहीं।
मीन संक्रांति का महत्व
हिंदू धर्म में संक्रांति का काफी महत्व होता है। सूर्य जब-जब गुरु के स्वामित्व वाली राशि धनु और मीन राशि में प्रवेश करते हैं तो सूर्य का संक्रमण काल शुरू हो जाता है। मीन संक्रांति सौरवर्ष का आखिरी माह माना जाता है। मीन संक्रांति पर एक माह के लिए खरमास आरंभ हो जाता है। खरमास हिंदू पंचांग के अनुसार एक विशेष अवधि है जो सूर्य के धनु और मीन राशि में प्रवेश के दौरान आती है। इस समय सूर्य कमजोर स्थिति में होता है, जिससे शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है। यह समय लगभग 30 दिनों का होता है। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, और अन्य मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।
खरमास में क्या करें
वैदिक ज्योतिष शास्त्र और हिंदू धर्म में खरमास का विशेष महत्व होता है। खरमास के दौरान भगवान विष्णु और सूर्यदेव की विशेष पूजा करनी चाहिए। इस दौरान श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ और विष्णु सहस्रनाम का जाप लाभकारी होता है। इसके अलावा इस महीने तुरसी जी की पूजा दान करने का महत्व होता है। खरमास के दौरान गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े, और धन का दान करना शुभ फलदायक होता है। इसमें गंगा स्नान और गायत्री मंत्रों का जाप भी काफी फलदायी होता है।
खरमास में क्या न करें
खरमास के दौरान कोई भी मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नए वाहन की खरीद, आदि नहीं करना चाहिए। क्योंकि इस समय सूर्य की स्थिति कमजोर होती है। इसके अलावा खरमास के दौरान नए व्यापार, नए प्रोजेक्ट, या किसी बड़े उद्यम की शुरुआत करने से बचना चाहिए। खरमास में किसी के प्रति द्वेष, जलन, या नफरत की भावना नहीं रखनी चाहिए। वहीं खरमास में भौतिक सुख-सुविधाओं का अत्यधिक सेवन नहीं करना चाहिए।