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आपके लिए भी कोई करवा चौथ रखता, जानिए खास बातें

Sat, 19 Oct 2013 05:05 PM IST
पंडित जयगोविंद शास्त्री
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कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को महिलाएं अपने सुहाग की रक्षा और परिवार की मंगल कामना के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हैं। पुराणों के अनुसार पति, पुत्र-पौत्र तथा सुख-सौभाग्य की वृद्धि के लिए इस दिन शिव परिवार के साथ-साथ चंद्रमा का पूजन भी करने का विधान है।
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ऐसी मान्यता है कि अक्षय तृतीया, हरतालिका तीज की ही तरह करवा चौथ व्रत में भी सुख-सौभाग्य की वृद्धि करने की क्षमता है। व्रत के दिन महिलाएं रात्रि में चंद्रमा के दर्शन कर अर्ध्य देने के बाद ही जल-भोजन ग्रहण करती हैं। व्रती महिलाओं को पूजा के बाद मिट्टी या तांबे के करवे में चावल, उड़द की दाल, सुहाग-सृंगार की सामग्री दान करते हुए परिवार के बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना चाहिए।

स्त्री किसी भी जाति, वर्ण या संप्रदाय की हो, सभी यह व्रत करके अपने पति की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सौभाग्य की कामना कर सकती हैं। यह व्रत वही स्त्रियाँ रख सकती हैं जो अपने घर-परिवार सास-श्वसुर एवं बड़ों का आदर-सम्मान करती हों। परिवार को तोडने वाली, अति झगड़ालू महिलाएं, माता-पिता का तिरस्कार करनेवाली महिलाओं को यह व्रत करने से बचना चाहिए अन्यथा माता पार्वती का कोपभाजन होना पड़ सकता है।
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इस दिन सायंकाल भगवान शिव-पार्वती, स्वामी कार्तिकेय, गणेश एवं चंद्रमा का षोडशोपचार विधि से पूजन करते हुए लड्डू का नैवेद्य अर्पित करें और रात्रि के समय चंद्रमा का दर्शन करके यह मंत्र पढते हुई अर्घ्य दें, मंत्र है- '' सौम्यरूप महाभाग मंत्रराज द्विजोत्तम, मम पूर्वकृतं पापं औषधीश क्षमस्व मे।

अर्थात हे ! मन को शीतलता पहुंचाने वाले, सौम्य स्वभाव वाले ब्राह्मणों में श्रेष्ठ, सभी मंत्रों एवं औषधियों के स्वामी चंद्रमा मेरे द्वारा पूर्व के जन्मों में किए गए पापों को क्षमा करें। मेरे परिवार में सुख शांति का वास रहे।

माता-पिता एवं पति का आशीर्वाद लेने के बाद ब्राह्मणों को दक्षिणा दें। सासूजी को भी एक पंचपात्र वस्त्र और विशेष करवा भेंट करके आशीर्वाद लें। अगर वह नही हैं तो किसी महिला को साड़ी दान दें। परिवार के साथ भोजन करें।
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