हिंदू धर्म में कार्तिक माह का विशेष महत्व होता है
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हिंदू धर्म में कार्तिक मास को वर्ष का सबसे पवित्र महीना कहा गया है। यह महीना भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना के लिए श्रेष्ठ माना गया है। पुराणों के अनुसार इस मास में किया गया छोटा-सा पुण्य कर्म भी अनंत गुना फल देता है। इसी कारण इस महीने में स्नान, दान, दीपदान और वृक्ष पूजन की विशेष परंपरा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कार्तिक मास में कुछ विशेष वृक्षों पर लाल कलावा (मौली) बाँधने से घर में धन, सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। साथ ही नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव समाप्त हो जाता है।
पीपल का वृक्ष- देवताओं का निवास
शास्त्रों में पीपल को देव वृक्ष कहा गया है। इसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास माना गया है। कार्तिक मास रविवार को छोड़कर किसी भी दिन पीपल के पेड़ पर लाल कलावा बाँधकर सात बार परिक्रमा करनी चाहिए। इस उपाय से पितृदोष समाप्त होता है और घर में बरकत बढ़ती है। जो व्यक्ति नियमित रूप से पीपल की पूजा करता है, उसे जीवन में कभी दरिद्रता का सामना नहीं करना पड़ता। वास्तु शास्त्र के अनुसार भी पीपल नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और वातावरण को पवित्र बनाता है।
तुलसी का पौधा-घर की लक्ष्मी
तुलसी को माता लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है और कार्तिक मास में तुलसी विवाह का पर्व भी मनाया जाता है। इस मास में तुलसी के पौधे पर कलावा बाँधकर दीपक जलाने से घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। वैवाहिक जीवन में मधुरता बनी रहती है और पारिवारिक कलह समाप्त होती है। तुलसी की पूजा से पाप नष्ट होते हैं और धन की कमी दूर होती है। यह पौधा घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने का सबसे बड़ा स्रोत माना गया है।
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बरगद का वृक्ष-स्थायित्व और दीर्घायु का प्रतीक
बरगद को अक्षय वृक्ष कहा गया है। यह दीर्घायु और स्थायित्व का प्रतीक है। कार्तिक पूर्णिमा या सोमवार के दिन बरगद के वृक्ष पर कलावा बांधकर जल चढ़ाना अत्यंत शुभ फल देता है। ऐसा करने से जीवन की रुकावटें दूर होती हैं और पारिवारिक संबंधों में मजबूती आती है। धार्मिक मान्यता है कि इस वृक्ष की पूजा करने से संतान और परिवार पर संकट नहीं आता तथा जीवन में स्थिरता बनी रहती है।
आंवला वृक्ष-रोग नाशक और सौभाग्यवर्धक
कार्तिक मास में आंवला नवमी का पर्व विशेष रूप से मनाया जाता है। इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा और परिक्रमा का विधान है। इस मास में आँवले पर कलावा बाँधकर पूजा करने से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और घर के सदस्यों का स्वास्थ्य उत्तम रहता है। यह वृक्ष सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। वास्तु के अनुसार, आंवला नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर घर में सकारात्मक कंपन उत्पन्न करता है।