Kartik Mass 2025: हिंदू पंचांग में कार्तिक मास को वर्ष का सबसे शुभ और पुण्यदायी महीना माना गया है। यह वह काल है जब साधना, स्नान, दान और दीपदान के माध्यम से व्यक्ति आत्मशुद्धि प्राप्त कर सकता है। धर्मग्रंथों में इसे भगवान विष्णु का प्रिय महीना बताया गया है। ब्रह्माजी ने नारदजी से कहा था “न कार्तिकसमो मासो न कृतेन समं युगं, न वेदं सदृशं शास्त्रं न तीर्थं गंगया समं।” अर्थात कार्तिक मास के समान कोई महीना नहीं, सतयुग के समान कोई युग नहीं, वेद के समान कोई शास्त्र नहीं और गंगा के समान कोई तीर्थ नहीं। इस मास में किए गए सभी शुभ कार्य स्नान, दान, व्रत और दीपदान देवताओं द्वारा स्वयं स्वीकार किए जाते हैं।
2. दीपदान से फैलता है ज्ञान का प्रकाश
कार्तिक मास में दीपदान का विशेष महत्व बताया गया है। संध्या के समय घर के मुख्य द्वार, तुलसी के पौधे और मंदिरों में दीप जलाने से अज्ञान का अंधकार मिटता है और ज्ञान का प्रकाश फैलता है। दीपदान को लक्ष्मी प्राप्ति और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस मास में जलाया गया एक दीप सहस्र दीपों के बराबर फल देता है।
3. सात्विक आहार और संयम का महत्व