महाभारत में कहा गया है कि राजा से शासन करते हुए कोई अपराध हो गया हो तो भूमि दान करने पर मुक्ति मिल जाती है। भूमि का दान उत्तम दान है लेकिन आज मंहगाई के जमाने में भूमि दान करना सभी के लिए संभव नहीं है। ऐसे में कामिका एकादशी व्रत एक ऐसा व्रत है जो वही पुण्य प्रदान करता है जो पूरी धरती दान करने से प्राप्त होता है।
श्रावण मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम कामिका एकादशी है। यह एकादशी इस वर्ष 14 जुलाई को है। इस दिन हाथ में शंख, चक्र, गदा और कमल लिये हुए चतुर्भुज भगवान विष्णु की पूजा होती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा से नाग, किन्नर और अन्य देवताओं की भी पूजा हो जाती है। भगवान कृष्ण ने कहा है कि कामिका एकादशी के दिन जो व्यक्ति भगवान के सामने घी अथवा तिल के तेल का दीपक जलाता है उसके पुण्य की गिनती चित्रगुप्त भी नहीं कर पाते हैं।
इस एकादशी के व्रत की विधि दशमी से ही शुरू हो जाती है। इस दिन से ही व्रत रखने वाले को सात्विक भोजन करना चाहिए और वाणी पर नियंत्रण रखना चाहिए। एकादशी के दिन सुबह स्नान करके विष्णु भगवान की पूजा धूप, दीप, फल, फूल एवं नैवेद्य से करना चाहिए। व्रत रखने वाले को एकादशी की कथा सुननी चाहिए।
जो लोग इस दिन व्रत नहीं कर पाते हैं वे भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं तब भी उन्हें पुण्य मिलता है। इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से उत्तम फल मिलता है। व्रत के दौरान झूठ, धोखा, बेईमानी एवं परनिंदा से बचें।