हिंदी कैलेंडर का तीसरा महीना ज्येष्ठ चल रहा है। ज्येष्ठ के महीने में गर्मी अपने चरम पर होती है। इस महीने में गर्मी इतनी अधिक पड़ती है कि पानी के लगभग सभी स्त्रोत जैसे नदी, तालाब, कुंड और झरने सभी सूख जाते हैं। ज्येष्ठ का महीना सबसे ज्यादा गर्म होने की वजह से यह सबसे ज्यादा कष्टकारी रहता है। इस महीने सूर्यदेव का रौद्र रूप धरती पर सबसे ज्यादा पड़ता है। जिस कारण सभी नदियों और तालाब में बहुत ही कम पानी रह जाता है। जिसके कारण पशु-पक्षियों का जीवन भी कष्टकारी हो जाता है। हिंदू धर्म और मान्यताओं में ज्येष्ठ माह में जल के संरक्षण को विशेष ध्यान रखते है इस तरह के व्रत और त्योहार रखे जाते हैं जिसमें पानी के महत्व के बारे में बताया जाता है। ज्येष्ठ महीने में गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी जैसे व्रत रखे जाते हैं। यह व्रत प्रकृति में जल को बचाने का संदेश देते हैं। गंगा दशहरा में नदियों की पूजा और निर्जला एकादशी में बिना जल का व्रत रखा जाता है। ज्येष्ठ माह को आम बोलचाल की भाषा में जेठ का महीना भी कहा जाता है। इस महिने में भारत के उत्तरी भाग में भीषण गर्मी पड़ती है। माह के शुरुआती दिनों में नौतपा के चलते तेज गर्म हवाएं चलती हैं। शास्त्रों में ज्येष्ठ के महिने का खास धार्मिक महत्व बताया गया है।
ज्येष्ठ मास में जल दान का महत्व
जल के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है इसलिए कहा जाता है कि जल ही जीवन है। ज्येष्ठ मास में जल दान उपयुक्त माना गया है। पक्षियों के लिए घर की छत या बगीचे में जल का पात्र भर कर रखे जाते हैं। पशु-पक्षी भी प्रकृत्ति की अनमोल देन है और साथ-साथ ये ज्योतिष की दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण हैं। आपने देखा होगा कि हर देवी-देवता का कोई ना कोई वाहन होता है जो पशु या पक्षी है, मान्यताओं के अनुसार इन वाहनों की पूजा करने से संबंधित देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। कुछ ऐसा ही ज्योतिष शास्त्र में देखा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सौरमंडल के हर ग्रह का संबंध किसी ना किसी पक्षी या पशु से होता है, अगर ग्रह को शांत या प्रसन्न करना है संबंधित पक्षियों या पशुओं की सेवा करनी चाहिए।
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ज्येष्ठ माह नाम कैसे पड़ा ?
ज्येष्ठ माह में नौतपा आता है इस दौरान गर्मी अपने चरम पर होती है। नौतपा में 9 दिनों तक गर्मी प्रचंड रूप में होती है। 25 मई से नौतपा शुरू हो रहा है, जो 3 जून तक रहेगा। सूर्य की ज्येष्ठता के कारण इस माह को ज्येष्ठ कहा जाता है। जेठ के महीने में गर्मी अपने चरम पर रहती है। इन दिनों सर्वाधिक बड़े दिन होते हैं। जेठ के महीने में धर्म का संबंध पानी से जोड़ा गया है, ताकि जल का संरक्षण किया जा सके। जेठ के महीने में पानी से जुड़े व्रत- त्योहार मनाए जाते हैं। जिसमें गंगा दशहरा और दूसरा निर्जला एकादशी प्रमुख है।
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ज्येष्ठ माह में क्या करें
1. ज्येष्ठ महीने में सूर्य अपने रौद्र रूप में होता है, जिसके चलते गर्मी बढ़ जाती है, साथ ही बढ़ जाता है पानी का महत्व। शास्त्रों में इस महीने में पानी के संरक्षण पर खास जोर दिया गया है।
2. ज्येष्ठ मास में जल के दान का बहुत बड़ा महत्व है। भीषण गर्मी में पानी की दिक्कत होने ही लगती है, जिसके चलते कई लोगों को पीने का पानी भी नहीं मिल पाता, इसलिए इस महीने जल का दान करना अत्यंत लाभकारी बताया गया है।
3. जेठ माह में घर की किसी भी खुली जगह या छत पर चिड़ियों के लिए दाना और पानी रखना चाहिए। गर्मी के कारण नदी-तालाब सूखने लगते हैं, जिसके चलते पक्षियों को पानी नहीं मिल पाता, इसलिए घर के बाहर या छत पर पक्षियों के लिए दाना-पानी जरूर रखें। मान्यता है कि पक्षियों को दाना-पानी देना लाभकारी होता है।
4. ज्येष्ठ के महीने में भगवान राम से पवनपुत्र हनुमान की मुलाकात हुई थी, जिसके चलते ये महीना हनुमानजी की पूजा के लिए बहुत खास है। जेठ में श्री राम के साथ हनुमानजी की पूजा करना शुभ फलदायी होता है। इसी महीने बड़े मंगलवार का पर्व मनाया जाता है, जिसमें हनुमानजी की खास पूजा होती है।