ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है कि अगर कुण्डली में कालसर्प योग या पितृ दोष बन रहा है तो इसका एक कारण पितरों की नाराजगी हो सकती है। पितरों के नाराज होने से जीवन में अचानक उन्नति रुक जाती है।
आपका बनता हुआ काम भी बार-बार अटक जाता है। किसी भी काम में आसानी से सफलता नहीं मिलती। इसलिए पितरों को खुश रखने के उपाय हमेशा किए जाने चाहिए।
अगर आप पूरे साल पितरों को प्रसन्न करने वाले उपाय नहीं कर पाएं तो पितृपक्ष में जरुर करना चाहिए। इन दिन 8 सितंबर से 23 सितंबर तक पितृपक्ष चल रहा है। इन दिनों आप ब्राह्मण भोजन और दान से पितरों की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। पितरों के नाम से दान करने के लिए छह चीजों का बड़ा ही महत्व है।
श्राद्घ में काले तिल के दान का महत्व
काला तिल भगवान विष्णु को प्रिय है। श्राद्ध के हर कर्म में तिल की आवश्यकता होती है। श्राद्ध पक्ष में दान करने वाले को कुछ भी दान करते समय हाथ में काला तिल लेकर दान करना चाहिए।
इससे दान का फल पितरों को प्राप्त होता है। अगर कुछ अन्य वस्तु दान नहीं कर रहे हैं तो सिर्फ तिल का दान भी किया जा सकता है। तिल का दान करने से पितर गण संकट एवं विपदाओं से रक्षा करते है।
भूमि दान का महत्व
शास्त्रों में भूमि दान को सर्वोत्तम दान में से एक कहा गया है। महाभारत में कहा गया है कि भूलवश बड़े से बड़ा पाप हो जाने पर भूमि दान करने से पाप से मुक्ति मिल जाती है।
भूमि दान से अक्षय पुण्य मिलता है। मान्यता है कि पितरों के निमित्त भूमि दान करने से पितरों को पितर लोक में रहने के लिए अच्छा स्थान मिलता है।
जो लोग आर्थिक रूप से संपन्न हैं उन्हें पितृ पक्ष में भूमि का दान करना चाहिए। जिनके लिए भूमि दान करना संभव नहीं हो वह भूमि के स्थान पर मिट्टी का दान भी कर सकते हैं।
श्रद्धापूर्वक मिट्टी का दान करने से भी पितर संतुष्ट हो जाते हैं। भूमि दान से यश, मान-सम्मान एवं स्थायी संपत्ति में वृद्धि होती है।
चांदी का दान का महत्व
पुराणों के अनुसार पितरों का निवास चन्द्र के ऊपरी भाग में है। शास्त्रों के अनुसार पितरों को चांदी वस्तुएं प्रिय हैं। चांदी, चावल, दूध से पितर खुश होते हैं।
पितरों की प्रसन्नता हेतु इन वस्तुओं का दान किया जा सकता है। इन वस्तुओं के दान से वंश की वृद्धि होती है एवं मनोवांछित फल प्राप्त होता है।
वस्त्रों का दान का महत्व
गरूड़ पुराण एवं कई शास्त्रों में बताया गया है कि पितरों को भी हमारी तरह सर्दी, गर्मी का एहसास होता है। मौसम के प्रभाव से बचने हेतु पितरगण अपने वंशजों एवं पुत्रों से वस्त्र की इच्छा रखते हैं।
जो व्यक्ति अपने पितरों के निमित्त वस्त्र दान करते हैं उन पर सदैव पितरों की कृपा बनी रहती है। पितरों को धोती एवं दुपट्टा का दान करना उत्तम माना गया है। वस्त्र दान से यमदूतों का भय समाप्त हो जाता है।
गुड़ और नमक दान का महत्व
जिन लोगों के घर में अक्सर कलह एवं आर्थिक परेशानी बनी रहती है उन्हें पितरों के निमित्त गुड़ एवं नमक का दान करना चाहिए। गरूड़ पुराण के अनुसार नमक के दान से यम का भय दूर होता है।