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Janmashtami 2020: जन्माष्टमी में कुंजबिहारी की आरती गाकर पाएं मुरलीवाले का आशीर्वाद

Wed, 12 Aug 2020 06:46 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
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जन्माष्टमी 2020 - आरती कुंजबिहारी की
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जन्माष्टमी भाद्रपद माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर मनायी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार द्वापर युग में इसी तिथि पर रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। इसी कारण इस दिन हर साल भगवान मुरलीवाले के भक्त उनकी आराधना करते हैं, उपवास रखते हैं और विधि विधान से उनकी पूजा-आरती करते हैं। कहा जाता है कि भगवान कृष्ण की आरती से भक्तों के समस्त प्रकार के कष्ट और दुख दूर हो जाते हैं। उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और सनातन धार्मिक कर्मकांड में भी आरती एक महत्वपूर्ण भाग होता है। इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। पूजा के आखिर में भगवान से पूजा में हुई किसी भी त्रुटि के लिए क्षमा प्रार्थना और आरती की जाती है। इसी के बाद पूजा का पूरा फल मिलता है। जन्माष्टमी के पावन पर्व पर यहां पढ़ें भगवान कृष्ण की आरती। भगवान श्रीकृष्ण की आरती इस प्रकार है -   

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आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

गले में बैजंती माला,
बजावै मुरली मधुर बाला ।
श्रवण में कुण्डल झलकाला,
नंद के आनंद नंदलाला ।
गगन सम अंग कांति काली,
राधिका चमक रही आली ।
लतन में ठाढ़े बनमाली
भ्रमर सी अलक,
कस्तूरी तिलक,
चंद्र सी झलक,
ललित छवि श्यामा प्यारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की...॥

कनकमय मोर मुकुट बिलसै,
देवता दरसन को तरसैं ।
गगन सों सुमन रासि बरसै ।
बजे मुरचंग,
मधुर मिरदंग,
ग्वालिन संग,
अतुल रति गोप कुमारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की...॥

जहां ते प्रकट भई गंगा,
सकल मन हारिणि श्री गंगा ।
स्मरन ते होत मोह भंगा
बसी शिव सीस,
जटा के बीच,
हरै अघ कीच,
चरन छवि श्रीबनवारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की...॥

चमकती उज्ज्वल तट रेनू,
बज रही वृंदावन बेनू ।
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू
हंसत मृदु मंद,
चांदनी चंद,
कटत भव फंद,
टेर सुन दीन दुखारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की...॥

आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

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