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कड़ी सुरक्षा के बीच ओडिशा में शुरू हुई जगन्नाथ यात्रा, लाखों श्रद्धालु पहुंचे

Sun, 25 Jun 2017 04:36 PM IST
amarujala.com- Presented by: अरविंद कुमार
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पुरी
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गुंडिचा महोत्सव से मशहूर जगन्नाथ रथयात्रा आज यानि रविवार को ओडिशा के साथ-साथ पूरी दुनिया में निकाली जा रही है। इस रथयात्रा में लाखों श्रद्धालु पुरी धाम के लिए जा रहे हैं। ये रथयात्रा प्रत्येक वर्ष आषाढ़ शुक्ल द्वितीय के दिन निकाली जाती है।
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इसमें ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक भी शामिल हुए हैं। राज्य पुलिस के मुताबिक, रथयात्रा के लिए कड़े सुरक्षा के प्रबंध किये गए हैं और साथ ही किसी भी तरह की चूक ना हो इसके लिए सैकड़ों कर्मचारियों की तैनाती भी की गई है।

बता दें कि आज के दिन भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ अपने जन्मस्थान श्रीगुंडिचा मंदिर के लिए प्रस्थान करते हैं। जहां वे नौ दिन तक रहते हैं। गुंडिचा मंदिर और पुरी श्री जगन्नाथ मंदिर के बीच की दूरी लगभग तीन किलोमीटर है। गुंडिचा मंदिर को दिव्य शिल्पकार विश्वकर्मा ने राजा इन्द्रध्युम्न की इच्छानुसार जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा के विग्रहों को दारुब्रम्ह से प्रकट किया था। 
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महीनों पहले शुरु होने लगती है तैयारी
जानकारी के मुताबिक भगवान जगन्ननाथ की रथयात्रा की तैयारी महीनों पहले ही शुरु कर दी जाती है और गुंडिचा महोत्सव की तैयारी लगभग पांच महीने पहले चलती है। जगन्नाथ का रथ 'गरुड़ध्वज' या 'कपिलध्वज' के नाम से जाना जाता है। 16 पहियों वाले इस रथ की उंचाई 13.5 मीटर होती है। वहीं, तलध्वज कहलाने वाला प्रभु बलराम का 14 पहियों वाला रथ 13.2 ऊंचा होता है।

सुभद्रा का रथ 'पद्मध्वज' कहलाता है जो 12.9 मीटर ऊंचा होता है। 12 पहिए के इस रथ में लाल, काले कप़ड़े के साथ लकड़ी के 593 टुकड़ों का प्रयोग होता है। शास्त्रों के अुनसार इस दिन भगवान जगन्नाथ खुद अपने भक्तों से मिलने के लिए और उनकों मुक्ति देने के लिए मंदिर से निकलकर रथ में प्रवेश करते हैं। 

यहां से शुरू होती है रथयात्रा
महाराज के 'छेरा पहांरा' से इस रथयात्रा की शुरुआत होती है। 'छेरा पहांरा' का मतलब है कि महाराज खुद सोने की झाड़ू से रथ के साथ-साथ उस रास्ते में झाड़ू लगाते हैं जिस रास्ते में भगवान का रथ निकलने वाला होता है। आज के दिन और बाहुड़ा यात्रा के दिन खुद पुरी के महाराज अपनी प्रजा को हाथ जोड़कर प्रणाम करते हैं। 
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