इन दिनों श्राद्ध पक्ष यानी पितृ पक्ष चल रहा है। महीने की 15 तारीख को महालया के दिन पितृ पक्ष समाप्त हो जाएगा। शास्त्रों में बताया गया है कि अपना कल्याण चाहने वालों को श्राद्ध पक्ष के दौरान श्रद्धा भाव से पितरों की पूजा करनी चाहिए।
किसी का अनादर न करें
मान्यता है कि इन दिनों में पितर किसी भी रूप में, कभी भी आपके द्वार आ सकते हैं इसलिए याद रखें कि आपके दरवाजे पर आने वाले किसी भी व्यक्ति का निरादर न हो। पितृ पक्ष में पशु-पक्षियों को अन्न-जल देना उत्तम फलदायी रहता है। भूले से भी इन दिनों कुत्ते, बिल्ली एवं गाय को मारना नहीं चाहिए। इन्हें भोजन देने से पितृगण संतुष्ट होते हैं। शास्त्रों में इन नियमों के अलावा और भी कई नियम बताए गये हैं।
सात्विकता का ध्यान रखें
जो व्यक्ति पितरों का श्राद्ध करता है उन्हें पितृ पक्ष में ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। खान-पान एवं रहन-सहन में पवित्रता एवं सात्विकता का ध्यान रखना चाहिए। पितृ पक्ष के दौरान मांस, मछली का सेवन करना वर्जित होता है। इससे पितृगण नाराज होते हैं। पितृ पक्ष की अवधि में चना, मसूर, सरसों, सरसों का साग, सत्तू, जीरा, मूली, काला नमक, लौकी, खीरा एवं बासी भोजन से परहेज रखना चाहिए।
अपनी भूमि पर तर्पण
शास्त्रों में कई स्थान बताए गये हैं जहां श्राद्ध एवं पिण्डदान करने से पितरों को मुक्ति मिलती है। जो लोग उन तीर्थ स्थल पर जाकर श्राद्ध नहीं कर पाते हैं उनके लिए यह नियम है कि वह अपने घर के आंगन अथवा अपनी जमीन पर कहीं भी तर्पण कर सकते हैं। किसी दूसरे की जमीन पर तर्पण करने से पितर श्राद्ध का अंश स्वीकार नहीं करते हैं।
काले तिल का महत्व
श्राद्ध एवं तर्पण क्रिया में काले तिल का बड़ा महत्व है। श्राद्ध करने वाले को पितृ कर्म काले तिल से करना चाहिए। सफेद एवं लाल तिल से किया गया श्राद्ध कर्म व्यर्थ होता है। इस अवधि में दान करते समय हाथ में काला तिल जरूर रखना चाहिए इससे दान का फल पितरों एवं दान कर्ता दोनों को प्राप्त होता है।
भोजन संबंधी नियम
पितृ पक्ष में पितरों को प्रसन्न करने के लिए ब्रह्ममणों को भोजन करवाने का नियम है। ब्रह्मणों को भोजन करवाते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि ब्राह्मण धार्मिक विचारों वाला और सात्विक हो। झूठ बोलकर एवं गलत तरीके से धन अर्जित करने वाले को एवं ईश्वर में श्रद्धा नहीं रखने वाले को पितृ पक्ष में भोजन नही करना चाहिए।
पितृ पक्ष में भोजन करने वाले के लिए भी नियम है कि श्राद्ध का अन्न ग्रहण करने के बाद कुछ न खाएं। इस दिन अपने घर में भी भोजन नहीं करना चाहिए। जो व्यक्ति इस नियम का पालन नहीं करता है उसे मृत्यु के बाद प्रेत योनी में जाना पड़ता है।