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संगति का असर कैसे पड़ता है हमारे जीवन में, रामचरित मानस में है इसका जिक्र

Sat, 07 Sep 2019 12:04 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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आसपास का वातावरण किस तरह का है इस बात का हमारे जीवन में व्यापक असर पड़ता है। अच्छी संगति में अच्छा सीखने को मिलता है बुरी संगत में बुरा ही सीखने को मिलता है। इन बातों का जिक्र सबसे बड़े ग्रंथ रामचरितमानस में भी है।

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रामचरितमानस मे तुलसीदास जी ने इस बात का जिक्र किया है। तुलसीदास जी लिखते हैं।

गगन चढ़इ रज पवन प्रंसगा । कीचहिं मिलइ नीच जल संगा।।

साधु असाधु सदन सुक सारीं । सुमिरहिं राम देहिं गनि गारीं।।  

जिस तरह से हवा के साथ मिलकर धूल आंधी का असर आकाश तक होता है और मिट्टी में जल मिलकर कीचड़ बन जाता है, उसी तरह का असर इंसान के जीवन में संगत का होता है। 

जैसे साधु के घर पर तोता-मैना परमात्मा का नाम जपते हैं और असाधु के घर में तोता-मैना गिन-गिन कर गालियाँ देते हैं।

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