आज यानि 2 नवंबर को गोवर्धन पूजा है। हिंदू धर्म में गोवर्धन पूजा का विशेष महत्व है। इसे अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व दिवाली के दूसरे दिन मनाया जाता है। गोवर्धन पूजा के दिन महिलाएं घर से बाहर गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाती हैं और उसकी पूजा करती हैं। इस दिन भगवान कृष्ण की पूजा का विधान है। इस दिन कुछ खास उपायों को करना भी बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और घर में खुशहाली का वास होता है। आइए जानते हैं गोवर्धन पूजा वाले दिन कौन से खास उपाय किए जा सकते हैं...
श्री कृष्ण की तस्वीर
इस दिन आप गोवर्धन पर्वत उठाए हुए भगवान श्री कृष्ण की तस्वीर घर में लगा सकते हैं। इस विपरीत परिस्थितियों से मुकाबला करने और आत्म बल में वृद्धि का प्रतीक माना जाता है। अपनी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाए हुए भगवान श्री कृष्ण की तस्वीर को ऐसी जगह लगे जहां पर सभी सदस्यों की नजर उसे पर बार-बार पड़े। माना जाता है ऐसा करने से परिवार के सदस्यों में आपसी तालमेल और विश्वास बना रहता है। ध्यान रहे कि इस तस्वीर में श्री कृष्ण के साथ उनके ग्वाल बाल सखा भी हो।
नकारात्मक ऊर्जा दूर करें
अपने घर से नकारात्मकता दूर करने के लिए गोवर्धन पूजा की दिन संध्याकाल के समय गाय का गोबर जलाकर धुआं करें। इससे आसपास मौजूद नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है और घर परिवार में सुख शांति बनी रहती है।
श्रीकृष्ण को भोग
गोवर्धन पूजा के दिन भगवान श्रीकृष्ण को अन्नकूट का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और श्रीकृष्ण सदैव अपनी कृपा बरसाते हैं। इसके अलावा घर में धन और अन्य की कभी भी कमी नहीं होती है।
पीपल की पूजा
गोवर्धन पूजा के पावन अवसर पर भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए आप पीपल के पेड़ के सामने 7 दीपक जलाएं। इससे श्रीहरि का आशीर्वाद मिलता है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
तुलसी की पूजा
तुलसी को मां लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। इस दिन तुलसी में जल अवश्य चढ़ाएं और इनके आगे घी का दीपक जलाएं। ऐसा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती है और आप पर कृपा बरसाती हैं।
मंत्र जप करें
गोवर्धन धराधार गोकुल त्राणकारक।
विष्णुबाहु कृतोच्छ्राय गवां कोटिप्रभो भव।।
आरती करें
श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
तोपे पान चढ़े तोपे फूल चढ़े,
तोपे चढ़े दूध की धार।
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
तेरी सात कोस की परिकम्मा,
और चकलेश्वर विश्राम
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
तेरे गले में कण्ठा साज रहेओ,
ठोड़ी पे हीरा लाल।
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
तेरे कानन कुण्डल चमक रहेओ,
तेरी झाँकी बनी विशाल।
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
गिरिराज धरण प्रभु तेरी शरण।
करो भक्त का बेड़ा पार
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।