ठाकुर जी
यानी भगवान श्री कृष्ण को पृथ्वी पर सशरीर उपस्थित देवता माना जाता है। मान्यता है
श्री कृष्ण आज भी पृथ्वी पर विराजमान हैं। इसलिए इनकी भक्ति और सेवा उसी प्रकार से
की जाती है जैसे एक महापुरूष की होती है। मनुष्य को दैनिक जीवन में जिस प्रकार से
भोजन, वस्त्र, बिछावन की जरूरत पड़ती है उसी प्रकार से ठाकुर जी को भी इनकी
आवश्यकता होती है।
ठाकुर जी को गर्मी के मौसम में गर्मी लगती है और सर्दी की
ठिठुरन से यह भी कांपते हैं। इसलिए मौसम के अनुरूप इनकी सेवा और भक्ति का तरीका बदल
जाता है। गर्मी के मौसम में ताप से बचाने के लिए इन्हें चंदन का लेप लगाया जाता है
तो सर्दी में सिगड़ी (अंगीठी) जलाकर शरीर में गर्माहट दी जाती है। ठाकुर जी आराम से
सो सकें इसके लिए इन्हें रजाई एवं गद्दे की भी जरूरत पड़ती है। भगवान की इन जरूरतों
का उनके भक्त पूरा ख्याल रखते हैं। इसका प्रमाण इन दिनों वृंदावन में दिख रहा है।
वृंदावन के सेवाकुंज मंदिर, राधारमण मंदिर, राधा दामोदर, श्याम सुंदर,
गोपीनाथ मंदिर, यशोदानंद, रंगजी, गोकुलानंद एवं राधिका प्रियावल्लभ मंदिर में इन
दिनों अंगीठी जलाकर प्रभु को सर्दी से बचाने के उपाय किये जा रहे हैं। सर्दी बढ़ने
की वजह से यहां ठाकुर जी के श्री विग्रहों की सेवा-पूजा पद्धति में भी बदलाव आ गया
है। भगवान के शयन के लिए रजाई एवं गद्दे की व्यवस्था की गयी है।
सेवायत
ब्रजानंद गोस्वमी, मनोज गोस्वामी, राजीव गोस्वामी, विष्णु वल्लभ गोस्वामी, मोहित
मराल गोस्वामी बताते हैं कि ठाकुर जी को सर्दी से बचाने के उपाय पौष से माघ मास तक
चलता है। इस दौरान भगवान को प्रसाद स्वरूप शरीर में गर्माहट पैदा करने वाले व्यंजन
और भोग सामग्री अर्पित किया जाता है।