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Ganga Dussehra 2026 : गंगा दशहरा आज, जानिए कथा कैसे शिव जी की जटाओं से धरती पर उतरीं पतितपावनी मां गंगा

Mon, 25 May 2026 05:11 AM IST
Vinod Shukla धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

हिंदू धर्म में गंगा नदी को बहुत ही पवित्र और पूजनीय माना जाता है। ज्येष्ठ माह की दशमी तिथि पर भगवान शिव की जटाओं से निकलकर पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। इसी पावन तिथि को गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है।
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Ganga Dussehra 2026 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल दशमी और हस्त नक्षत्र के शुभ संयोग में मां गंगा भगवान शिव की जटाओं से निकलकर पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। इसी पावन तिथि को गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान, दान और पूजा करने से मनुष्य के दस प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख-शांति का आगमन होता है। इस वर्ष 25 मई 2026 को गंगा दशहरा का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा।
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गंगा अवतरण की पौराणिक कथा
पुराणों के अनुसार राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए कठोर तप किया था। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर माँ गंगा पृथ्वी पर आने के लिए तैयार हुईं, लेकिन उनके वेग को संभालना पृथ्वी के लिए संभव नहीं था। तब भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में धारण किया और धीरे-धीरे पृथ्वी पर प्रवाहित किया। इसी दिव्य घटना की स्मृति में गंगा दशहरा मनाया जाता है। इस दिन मां गंगा को विष्णुपदी और पुण्यसलिला के रूप में पूजा जाता है।

गंगा स्नान से मिटते हैं जन्मों के पाप
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व माना गया है। विष्णु पुराण में बताया गया है कि गंगा का नाम लेने, उसका दर्शन करने, जल का स्पर्श करने और उसमें स्नान करने मात्र से मनुष्य के तीन जन्मों तक के पाप नष्ट हो जाते हैं। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से स्नान करने पर अनजाने में हुए दोष और कष्टों से भी मुक्ति मिलती है।
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घर पर भी पा सकते हैं गंगा स्नान का पुण्य
यदि किसी कारणवश श्रद्धालु गंगा नदी तक नहीं पहुंच पाते, तो भी वे घर पर गंगाजल की कुछ बूंदें स्नान के बाद अपने ऊपर छिड़क सकते हैं। स्कंद पुराण में बताया गया है कि माँ गंगा का स्मरण करते हुए स्नान करने से भी पुण्य की प्राप्ति होती है। गंगाजल का स्पर्श और सेवन भी अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।

हरिद्वार, प्रयाग और संगम स्नान का विशेष महत्व
मत्स्य, गरुड़ और पद्म पुराण के अनुसार हरिद्वार, प्रयागराज और गंगा-सागर संगम में स्नान करना अत्यंत फलदायी माना गया है। मान्यता है कि इन तीर्थों में गंगा दशहरा के दिन स्नान करने वाला व्यक्ति मृत्यु के बाद उत्तम लोकों को प्राप्त करता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि इस दिन लाखों श्रद्धालु पवित्र नदियों के तट पर स्नान और पूजा-अर्चना करते हैं।

दस प्रकार के पापों से मिलती है मुक्ति
शास्त्रों में बताया गया है कि गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान और उपवास करने से मनुष्य दस प्रकार के पापों से मुक्त हो जाता है। इनमें दैहिक, वाणी और मानसिक पाप शामिल हैं। बिना दी हुई वस्तु लेना, हिंसा करना और परस्त्री संगम दैहिक पाप माने गए हैं। झूठ बोलना, कठोर वचन कहना, चुगली करना और किसी को वाणी से दुख देना वाचिक पाप हैं। वहीं दूसरे के धन का लालच करना, किसी का बुरा सोचना और असत्य में आग्रह रखना मानसिक पाप कहे गए हैं।

गंगा स्नान के समय करें इस दिव्य मंत्र का जाप
गंगा स्नान के दौरान भगवान नारायण द्वारा बताए गए मंत्र 

“ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः”
का श्रद्धापूर्वक स्मरण करना अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि इस मंत्र के जाप से व्यक्ति को परम पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

गंगा दशहरा पर दस संख्या का विशेष महत्व
स्कंद पुराण के अनुसार गंगा दशहरा के दिन दस संख्या का विशेष महत्व होता है। इस दिन दस पुष्प, दस फल, दस दीप, दशांग धूप और दस प्रकार के नैवेद्य अर्पित करने चाहिए। दान की वस्तुएं भी दस की संख्या में देना शुभ माना गया है। साथ ही गंगा स्नान करते समय दस बार डुबकी लगाने का विधान बताया गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से माँ गंगा प्रसन्न होकर श्रद्धालु के सभी कष्टों और पापों का नाश करती हैं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।  
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