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दिपावली पर दीया जलाने का भी विज्ञान है

Fri, 25 Oct 2019 09:00 AM IST
विनोद शुक्ला आशुतोष वार्ष्णेय,ज्योतिषाचार्य
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वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो देसी घी का दीपक जलाने से उसमें उपस्थित विशिष्ट रसायनों का ऑक्सीकरण होने के कारण घर की धनात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है। गाय के दूध से बना घी स्वास्थ्य और पवित्रता की दृष्टि से सर्वोपयोगी है, अतः इसका प्रयोग सुबह-शाम पूजा के दौरान किया जाता है। देशी घी के दीपक की ऊर्जा से वातावरण में उपस्थित सूक्ष्म कीटाणुओं का नाश होता है। ऐसा सकारात्मक वातावरण स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है, इसलिए सभी शास्त्रों में देवी-देवताओं के समक्ष देसी घी का दीपक जलाने का विधान है। देसी घी के अलावा तेल का दीपक जलाने का वर्णन भी शास्त्रों में मिलता है।

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नजर उतारने से लेकर भूत-प्रेत बाधा, नकारात्मक ऊर्जा तथा शनि ग्रह से संबंधित ऊर्जाओं के संतुलन के लिए घी की अपेक्षा तेल का दीपक जलाने का विधान है। दीपावली पर घी के साथ तेल के असंख्य दीये जलाकर पर्यावरण की नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मक में बदलने का प्रयास किया जाता है, ताकि सकारात्मक ऊर्जा में लक्ष्मी का प्रवेश हो सके।

तेल का दीपक जलाने पर उससे उत्पन्न ऊर्जा का अक्सर काजल बनाने में भी प्रयोग किया जाता है। समृद्धि एवं सुख लाभ के लिए घी का दीपक जलाया जाता है तथा शत्रु संहार, ऋण मुक्ति एवं रोगमुक्ति के लिए तेल का दीपक जलाने का विधान है। पुराने जमाने में जब कोई मेहमान किसी के घर आता था, तो प्रवेश के समय उसकी आरती उतारने का विधान इसलिए था, ताकि दूर-दराज से व्यक्ति के साथ आने वाले सूक्ष्म कीटाणु एवं नकारात्मकता आरती से उत्पन्न सकारात्मक तरंगों में परिवर्तित हो जाएं। कीटाणु अग्नि और आरती की लौ और ऊर्जा से नष्ट हो जाते हैं, जिससे प्राणवायु सकारात्मकता से भर जाती है जो कि स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। 
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दीपक जलाते समय अक्सर इस मंत्र का उच्चारण किया जाता है। इसमें दीपक से प्रार्थना की जाती है, ‘हे सुंदर और कल्याणकारी, आरोग्य और संपदा को देने वाले दीप, शत्रु के विनाश के लिए हम तुम्हें नमस्कार करते हैं।’

‘शुभम् करोति कल्याणम् आरोग्यम् धन संपदा। शत्रु वृद्धि विनाशाय दीप ज्योति नमोस्तुते।।’

तेल का दीपक जलाया जाए तो उससे उत्पन्न होने वाली तरंगें दीपक बुझने के आधा घंटे बाद तक वातावरण को पवित्र बनाए रखती हैं। लेकिन घी वाला दीपक बुझने के बाद चार घंटे से अधिक समय तक सात्विक ऊर्जा को बनाए रखता है। दीपक चाहें तेल का हो अथवा घी का, इससे वातावरण में सात्विक तरंगों की उत्पत्ति होती है और अंधकार दूर होता है, शुभ शक्तियां आकर्षित होती हैं, हानिकारक किरणों का नाश होता है, फलस्वरूप घर में सुख-समृद्धि आती है।

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