दीपावली महापर्व की शुरुआत धनतेरस के दिन से हो जाती है जो भाईदूज तक चलता है। धनतेरस के दिन यानि कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी पर धन्वंतरि की पूजा की जाती है। दिवाली के दिन माता लक्ष्मी धरती पर आती है जिनका स्वागत करने के लिए कई दिनों से तैयारियां होती हैं। पांच दिनों तक चलने वाले इस महापर्व के बारे में आइए जानते है सबकुछ...
धनतेरस
दिवाली के पहले दिन धनतेरस आता है जिसमें भगवान धन्वंतरि की पूजा होती है। इस दिन खरीदारी की परंपरा है। मान्यता है कि जो भी वस्तु इस दिन खरीदी जाती है उसमें 13 गुने की वृद्धि होती है।
नरकचतुर्दशी
पांच दिवसीय दीपावली महापर्व के दूसरे दिन नरकचतुर्दशी कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। इस दिन घर के चौखट पर और नाली पर दीया जलाया जाता है।
लक्ष्मी गणेश पूजा
दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा होती है। पूजा में भगवान गणेश के दाहिने तरफ मां लक्ष्मी को स्थापित कर पूजा होती है।
गोवर्धन पूजा
कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन उत्सव मनाया जाता है। इस दिन बलि पूजा, अन्नकूट, मार्गपाली आदि उत्सव भी मनाएं जाते हैं। यह दिन उत्तर भारत से लेकर साउथ इंडिया तक बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। गोवर्धन पूजा में गोधन मतलब गाय की पूजा की जाती है।हिंदू मान्यता के अनुसार गाय को देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। जिस तरह देवी लक्ष्मी सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं, उसी तरह गौमाता हमें स्वास्थ्य रूपी धन प्रदान करती हैं।
भाई दूज
भाई दूज का पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहनें रोली और अक्षत से अपने भाई का तिलक कर उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं। जिसेक बदले में भाई अपनी बहन को कुछ उपहार देता है।