चारधाम की यात्रा एक मई से आरंभ हो रही है। अक्षय तृतीया के दिन गंगोत्री यमनोत्री के कपाट खुल जाएंगे। पिछले वर्ष चारधाम यात्रा के दौरान उत्तराखंड में भयंकर प्राकृतिक तबाही हुई थी।
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उसमें हजारों की संख्या में लोग काल के गाल में समा गए थे। इनमें गुड़गांव के दर्जन भर से अधिक लोग भी शामिल हैं। जिन्होंने उस त्रासदी में अपने परिजनों को खोया है आज भी उनके मन उसका खौफ है।
दहशत के कारण चार धाम की यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह की कमी है। टूर एंड ट्रैवल एजेंसियां इस बात से निराश हैं कि इस साल कोई बुकिंग नहीं हो रही है। हर बार जब चारधाम यात्रा का आरंभ होता था तो गुड़गांव के श्रद्धालुओं में वहां जाने के लिए होड़ सी मच जाती थी।
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चारधाम की यात्रा पूरी करके नहीं लौट सके जो
मगर इस बार सब कुछ ठंडा ही है। कोई वहां जाने का नाम नहीं ले रहा है। अकेले हेलीमंडी के 15 श्रद्धालुओं ने उत्तराखंड की तबाही में अपने प्राण गंवा दिए थे। उनके परिजनों को उनकी याद सता रही है। वहां जाने के बारे में अब वह सोच भी नहीं रहे हैं।
हेलीमंडी से केदारनाथ चारधाम यात्रा के लिए पिछले वर्ष की आठ जून को जो भक्त रवाना हुए थे, वह 16 जून को केदारनाथ धाम में आई आपदा के शिकार हो गए थे। कई भक्त यात्रा करके लौटने में सफल रहे। मगर सभी खुशनसीब नहीं थे।
गुड़गांव के जो लोग लौटकर नहीं आए उनमें बालकिशन वशिष्ठ, रमेश गोयल, बृजमोहन, अशोक अग्रवाल, रामकिशन, शंकर लाल, रामकिशन प्रजापत, आशा, चंद्रकला, गीता, संतोष गोयल, शांति देवी, सोमलता, संतोष सिंगला और रिसीबा के नाम शामिल हैं।
मुफ्त में चार धाम यात्रा कर सकेंगे इस बार
आपदा के बाद उत्तराखंड में अब सब ठीक चल रहा है, दुनियाभर में यह संदेश पहुंचाने के लिए चारधाम यात्रा के पहले पखवाड़े में प्रदेश से तीर्थयात्रियों का दल बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के दर्शन के लिए रवाना होगा।
यात्रियों के धाम तक आने-जाने के साथ उनके आवास, भोजन, स्वास्थ्य आदि की सुविधाएं राज्य सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जाएंगी। यह बात उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मंगलवार 22 अप्रैल को सोमेश्वर नगर मंदिर प्रांगण में आयोजित जनसभा में कही।
मुख्यमंत्री ने बताया कि केदारनाथ पैदल मार्ग पर सभी जरूरी संसाधन जुटाए जा रहे हैं। व्यवस्था का जायजा लेने के लिए वह केदारनाथ जाएंगे। कहा कि आपदा के बाद पैदा हुई समस्याओं को दूर करने के लिए सरकार कटिबद्ध है, लेकिन व्यवस्थाओं को सही ढर्रे पर लाने में दो से तीन साल का समय लगेगा।
उन्होंने भरोसा दिलाया की इस बार यात्रा तुलनात्मक रूप से सुरक्षित और सुगम होगी। यात्रा मार्गों की मरम्मत का कार्य 80 प्रतिशत पूरा हो चुका है। केदारनाथ पैदल मार्ग को दुरुस्त करने के लिए युद्धस्तर पर कार्य चल रहा है। चारों धामों के साथ हेमकुंड और कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग भी ठीक किए जा रहे हैं।