पूरे साल होने वाले षष्ठी व्रत में कार्तिक कृष्ण षष्ठी और चैत्र शुक्ल षष्ठी का बड़ा महत्व है। स्कंद पुराण में इसे स्कंद षष्ठी और संतान षष्ठी कहा गया है।
इस पुरण में कहा गया है कि इस व्रत से संतान सुख की प्राप्ति होती है। संतान की आयु और स्वास्थ्य के लिए भी यह व्रत उत्तम माना गया है।
ब्रह्मवैवर्तपुराण में बताया गया है कि स्कंद षष्ठी के व्रत से राजा प्रियव्रत के मृत बालक का नया जीवन मिल गया था। इसलिए उनके राज्य में प्रजा बड़ी श्रद्घा से इस व्रत को मनाने लगे। इस व्रत को लेकर ऋषि च्यवन की भी एक कथा है।