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Durga Stuti Path: चैत्र नवरात्रि में श्री दुर्गा स्तुति पाठ से जीवन के कष्ट होंगे दूर, मां का मिलेगा आशीर्वाद

Fri, 20 Mar 2026 12:53 PM IST
Shweta Singh ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, दुर्गा स्तुति का पाठ करना देवी दुर्गा  की आराधना करने और उनकी दिव्य कृपा प्राप्त करने का सबसे उत्तम और शक्तिशाली माध्यम । ऐसा कहा जाता है कि नवरात्रि जैसे शुभ अवसरों पर लगातार नौ दिनों तक दुर्गा स्तुति का पाठ करने से अनेक लाभ प्राप्त होते हैं।
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श्री दुर्गा स्तुति पाठ - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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सनातन धर्म के दुर्गा स्तुति का पाठ करना देवी की कृपा पाने और उन्हें प्रसन्न करने का एक उत्तम माध्यम है। नवरात्रि के पावन पर्व के दौरान दुर्गा स्तुति के पाठ का महत्व और भी बढ़ जाता है। कहा जाता है कि नवरात्रि के दौरान दुर्गा स्तुति का पाठ करने से भक्तों को स्पष्टता, विवेक और अंतर्दृष्टि जैसे सद्गुणों की प्राप्ति होती है। मार्कण्डेय पुराण के से ली गई यह स्तुति उन लोगों को मानसिक शांति प्रदान करती है जो इसका नियमित रूप से पाठ करते हैं।  यहां पढ़ें संपूर्ण दुर्गा स्तुति ।

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सर्व मंगल मांगल्य शिवे सर्वार्थ साधिके,
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।


श्री दुर्गा स्तुति 
जय जग जननी आदि भवानी,
जय महिषासुर मारिणी मां ।
उमा रमा गौरी ब्रह्माणी,
जय त्रिभुवन सुख कारिणी मां ।।

हे महालक्ष्मी हे महामाया,
तुम में सारा जगत समाया ।
तीन रूप तीनों गुण धारिणी,
तीन काल त्रैलोक बिहारिणी ।।

हरि हर ब्रह्मा इंद्रादिक के,
सारे काज संवारिणी मां ।
जय जग जननी आदि भवानी,
जय महिषासुर मारिणी मां

शैल सुता मां ब्रह्मचारिणी,
चंद्रघंटा कूष्मांडा मां ।
स्कंदमाता कात्यायनी माता,
शरण तुम्हारी सारा जहां।।

कालरात्रि महागौरी तुम हो
सकल रिद्धि सिद्धि धारिणी मां
जय जग जननी आदि भवानी
जय महिषासुर मारिणी मां

अजा अनादि अनेका एका,
आद्या जया त्रिनेत्रा विद्या।
नाम रूप गुण कीर्ति अनंता,
गावहिं सदा देव मुनि संता।।

अपने साधक सेवक जन पर,
सुख यश वैभव वारिणी मां ।।
जय जगजननी आदि भवानी,
जय महिषासुर मारिणी मां।।

दुर्गति नाशिनी दुर्मति हारिणी दुर्ग निवारण दुर्गा मां,
भवभय हारिणी भवजल तारिणी सिंह विराजिनी दुर्गा मां ।
पाप ताप हर बंध छुड़ाकर जीवो की उद्धारिणी मां,
जय जग जननी आदि भवानी जय महिषासुर मारिणी मां।।
 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता और संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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