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Chaitra Navratri 2026: मां दुर्गा को करना है प्रसन्न तो नवरात्रि में जरूर करें दुर्गा सप्तशती का पाठ

Thu, 19 Mar 2026 06:08 AM IST
Shweta Singh धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

नवरात्रि के पवित्र दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। देवी दुर्गा की कृपा प्राप्त करने और मन की इच्छाओं को पूरा करने के लिए इस पाठ का विशेष महत्व है।
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चैत्र नवरात्रि 2026 - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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Chaitra Navratri Durga Saptshati Path: आज यानी 19 मार्च को  चैत्र नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि है।  नवरात्रि के पवित्र दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। देवी दुर्गा की कृपा प्राप्त करने और मन की इच्छाओं को पूरा करने के लिए इस पाठ का विशेष महत्व है। लेकिन दुर्गा सप्तशती का संपूर्ण पाठ बहुत विस्तृत है इसलिए हर कोई प्रतिदिन इसका पाठ नहीं कर पाता। धार्मिक परंपरा के अनुसार यह माना जाता है कि यदि आप केवल 7 महत्वपूर्ण श्लोकों का ही पाठ करते हैं तो भी आपको वही फल प्राप्त होता है। ये 7 श्लोक देवी दुर्गा की महिमा, शक्ति और कृपा का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसा विश्वास है कि यदि आप इन श्लोकों का पाठ पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ करते हैं, तो आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि में वृद्धि होती है। 

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क्या है दुर्गा सप्तशती पाठ 
दुर्गा सप्तशती में कुल 13 अध्याय और 700 श्लोक हैं। ये श्लोक विशेष रूप से देवी दुर्गा के तीन दिव्य रूपों महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की महिमा और शक्ति का वर्णन करते हैं। प्रत्येक अध्याय का अपना एक विशेष महत्व है और इसमें जीवन में आने वाली विभिन्न समस्याओं का समाधान प्रदान करने की शक्ति है। हालांकि समय की कमी के कारण, हर कोई पूरे 13 अध्यायों का पाठ नहीं कर पाता। ऐसे भक्तों के लिए, शास्त्रों में एक सरल विधि सुझाई गई है। यदि पूरे अध्याय का पाठ करना संभव न हो, तो ऐसा माना जाता है कि यदि केवल 7 विशेष श्लोकों का ही जाप किया जाए, तो भी वही परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। आइए जानते हैं इन 7 प्रमुख श्लोकों के बारे में। 
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मां दुर्गा का सप्तशती पाठ

ॐ ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा। 
बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति।।

दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेष जन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि। 
दारिद्र्य दुःख भयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकार करणाय सदार्द्रचित्ता।।

सर्वमङ्गल माङ्गल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। 
शरण्ये त्र्यंम्बके गौरि नारायणि नमोस्तु ते॥

शरणागत दीनार्तपरित्राण परायणे 
सर्वस्यार्ति हरे देवि नारायणि नमोस्तु ते॥4॥

सर्वस्वरुपे सर्वेशे सर्वशक्ति समन्विते। 
भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोस्तु ते॥

रोगानशेषानपंहसि तुष्टारुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्। 
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता हि आश्रयतां प्रयान्ति॥

सर्वबाधा प्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि। 
एवमेव त्वया कार्यम् अस्मद् वैरि विनाशनम्॥



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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