फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chaitra navami 2021: 21 अप्रैल को है कन्या पूजन, पहले ही इकट्ठा कर लें पूजा की ये सारी सामग्री

Tue, 20 Apr 2021 01:14 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
kanya pujan 2021
विज्ञापन

शारदीय और चैत्र दोनों ही नवरात्रि के दौरान अष्टमी और नवमी तिथि का बहुत महत्व होता है। अष्टमी और नवमी तिथि पर हवन एवं कन्या पूजन किया जाता है। इस बार चैत्र शुक्ल नवमी तिथि 21 अप्रैल, 2021 को पड़ रही है। इस दिन मां दुर्गा के स्वरूप में नौ कन्याओं को घर पर आमंत्रित किया जाता है और उनका पूजन करने के साथ उन्हें भोजन कराया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कन्या पूजन करने से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार चैत्र शुक्ल नवमी पर ही भगवान राम का जन्म हुआ था इसलिए इस दिन को राम जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है, इसलिए नवमी तिथि को रामनवमी भी कहते हैं। कन्या पूजन से एक दिन पहले ही कन्याओं को आमंत्रण दे देना चाहिए और पूजन की सामग्री भी एकत्रित कर लेनी चाहिए ताकि नवमी तिथि पर कोई परेशानी न हो। तो चलिए आज जानते हैं नवमी पर कन्या पूजन करने की सारी सामग्री और विधि।

 

विज्ञापन

kanya pujan 2021
शुद्ध जल कन्याओं के पैर धोने के लिए
एक स्वच्छ कपड़ा पांव पोंछने के लिए
रोली और अक्षत (साबुत चावल) तिलक के लिए
फल, फूल और मिष्ठान
लौंग, कपूर, धूपबत्ती
मिट्टी या पीतल का दीपक, रुई और शुद्ध देसी घी
गोबर का उपला (यदि अग्यारी करनी हो तो)
एक छोटे से लोटे में जल
कन्याओं के लिए लाल चुनरी
और सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा या भेंट
कलावा (मौली)
जो भी भोजन कन्याओं को खिलाना हो, हलवा पूरी, चना या खीर उसका भी सारा सामान लाकर रख लें।

kanya pujan 2021
कन्या पूजन विधि-
जैसे ही कन्या और लंगुरिया (बालक) आपके घर में पधारे सबसे पहले साफ जल से उनके पैर धुलवाएं इसके बाद एक साफ कपड़े से पोंछने के बाद उन्हें आसन पर बिठाएं।
 
अब मंदिर में धूप दीप प्रज्वलित करें और माता रानी का तिलक करें। उन्हें पुष्प अर्पित करें।
 
उपले का एक टुकड़ा जलाकर उसकी अंगार को किसी पात्र में रखें और फिर उसपर कपूर लौंग का जोड़ा और थोड़ा सा घी चढ़ाएं और अग्नि प्रज्वलित करें। जल चढ़ाएं।
विज्ञापन

सभी कन्याओं का रोली और अक्षत से तिलक करें और लाल चुनरी उढ़ाएं। 
 
अब थोड़ा भोजन मंदिर में चढ़ा दें, फिर बालक और सभी कन्याओं के लिए भोजन परोसें।
 
कन्याओं के भोजन कर लेने के बाद एक बार और थोड़ा सा भोजन थाली में बढ़ा दें।
 
अब सभी कन्याओं और बालक के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद ग्रहण करें और उन्हें मिष्ठान, फल, दान दक्षिणा आदि दें।

इसके बाद घर से द्वार तक कन्याओं के रास्ते में जल की छींटे दें इसके बाद सभी को विदा करें।
 
इसके बाद स्वयं भी प्रसाद खाकर व्रत का पारण करें।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें