फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Baisakhi 2021: इस दिन है बैसाखी का पर्व, जानिए महत्व तिथि और मान्यताएं

Sat, 10 Apr 2021 08:01 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
बैसाखी 2021
विज्ञापन

बैसाखी पर्व को सिख समुदाय के लोग नए साल के रूप में मनाते हैं। इस बार बैसाखी का पर्व 13 अप्रैल 2021 को मनाया जाएगा। बैसाखी को फसलों के त्योहार के रूप में भी मनाया जाता है, क्योंकि यह समय रबी की फसल की कटाई का होता है। यह पर्व मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा में मनाया जाता है, इसके अलावा देश से लेकर विदेश में रहने वाले सिख समुदाय के लोग बैसाखी के पर्व को धूमधाम के साथ मनाते हैं। सिख समुदाय के लिए यह पर्व बहुत ही खास होता है, लोग भांगड़ा और गिद्दा करते हैं रिश्तेदारों और मित्रों के साथ मिलकर खुशियां मनाते हैं। तो चलिए जानते हैं कि इस पर्व का क्या है महत्व और कैसे मनाते हैं यह त्योहार।

विज्ञापन

बैसाखी 2021
बैसाखी का महत्व
बैसाखी के दिन ही सिखों के दसवें गुरू गुरु गोबिंद सिंह ने सन् 1699 में पवित्र खालासा पंथ की स्थापना की थी। गुरु गोविंद सिंह जी को उनके साहस और शौर्य के लिए जाना जाता है। गुरू गोबिंद सिंह जी ने लोगों में अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने और उनमें साहस भरने का बीडा़ उड़ाया। उन्होंने आनंदपुर में सिखों का संगठन बनाने के लिए लोगों का आवाह्न किया और इसी सभा में उन्होंने तलवार उठाकर लोगों से पूछा कि वे कौन बहादुर योद्धा हैं तब उनमें से एक व्यक्ति निकलकर आया गुरु गोविंद सिंह जी उन्हें अपने साथ पंडाल में ले गए और रक्त से सनी हुई तलवार लेकर वापस आए और दोबारा वापस आकर यही सवाल किया तो फिर से एक सेवक आया, इसी तरह से एक एक करके पांच लोग सामने आए जो पंज प्यारे कहलाए। इन्हें खालसा पंथ का नाम दिया गया।
विज्ञापन

Baisakhi
कैसे मनाई जाती है बैसाखी 
 
बैसाखी वाले दिन लोग सुबह जल्दी उठकर गुरूद्वारे में जाकर प्रार्थना करते हैं।
 
गुरुद्वारे में गुरुग्रंथ साहिब जी के स्थान को जल और दूध से शुद्ध किया जाता है और गुरु वाणी सुनी जाती है।
 
इस दिन श्रद्धालुओं के लिए विशेष प्रकार का अमृत तैयार किया जाता है जिसे लोगों में वितरित किया जाता है। लोग एक पंक्ति में लगकर अमृत को पाँच बार ग्रहण करते हैं।
 
अपराह्न के समय अरदास होती है और बाद प्रसाद को गुरु को चढ़ाया जाता है इसके बाद उसका वितरण किया जाता है।
 
इसके बाद सबसे अंत में लंगर चखा जाता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें