पंचांग के मुताबिक भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर की रात 11 बजकर 18 मिनट से आरंभ होगी और 25 सितंबर की रात 11 बजकर 6 मिनट पर समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। सनातन धर्म में अनंत चतुर्दशी का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। इसे अनंत चौदस के नाम से भी जाना जाता है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की विधि-विधान से पूजा की जाती है और पूजा के बाद हाथ में अनंत सूत्र धारण करने की परंपरा है।
अनंत सूत्र सामान्यतः कपास या रेशम के धागे से बनाया जाता है। इसमें 14 गांठें लगाई जाती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार ये गांठें भगवान विष्णु के विभिन्न नामों और स्वरूपों से जुड़ी मानी जाती हैं। इसी दिन गणेश विसर्जन भी किया जाता है, इसलिए यह पर्व धार्मिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
14 गांठ वाले अनंत सूत्र का क्या है महत्व?
अनंत चतुर्दशी की पूजा में अनंत सूत्र का विशेष महत्व बताया गया है। इसे शुद्ध रेशम या कपास के सूत को हल्दी में रंगकर तैयार किया जाता है और इसमें 14 गांठें लगाई जाती हैं। पूजा के दौरान भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए इसे हाथ या गले में धारण किया जाता है। मान्यता है कि अनंत सूत्र की प्रत्येक गांठ भगवान श्रीहरि के एक विशेष नाम का प्रतीक होती है। इन 14 नामों का स्मरण करते हुए सूत्र की पूजा की जाती है।
14 गांठों में पूजे जाने वाले भगवान विष्णु के नाम
- पहली गांठ-अनंत: पहली गांठ भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप को समर्पित मानी जाती है।
- दूसरी गांठ-ऋषिकेश: दूसरी गांठ भगवान के ऋषिकेश स्वरूप का स्मरण कर पूजी जाती है।
- तीसरी गांठ-पद्मनाभ: तीसरी गांठ भगवान पद्मनाभ को समर्पित मानी जाती है।
- चौथी गांठ-माधव: चौथी गांठ में भगवान माधव का ध्यान किया जाता है।
- पांचवीं गांठ-वैकुण्ठ: पांचवीं गांठ भगवान वैकुण्ठ स्वरूप के नाम से पूजी जाती है।
- छठी गांठ-श्रीधर: छठी गांठ भगवान श्रीधर को समर्पित मानी जाती है।
- सातवीं गांठ-त्रिविक्रम: सातवीं गांठ में भगवान त्रिविक्रम का स्मरण किया जाता है।
- आठवीं गांठ-मधुसूदन: आठवीं गांठ भगवान मधुसूदन के नाम से पूजी जाती है।
- नौवीं गांठ-वामन: नौवीं गांठ भगवान वामन स्वरूप को समर्पित मानी जाती है।
- दसवीं गांठ-केशव: दसवीं गांठ में भगवान केशव का ध्यान किया जाता है।
- ग्यारहवीं गांठ-नारायण: ग्यारहवीं गांठ भगवान नारायण को समर्पित मानी जाती है।
- बारहवीं गांठ-दामोदर: बारहवीं गांठ भगवान दामोदर के नाम से पूजी जाती है।
- तेरहवीं गांठ-गोविन्द: तेरहवीं गांठ में भगवान गोविन्द का स्मरण किया जाता है।
- चौदहवीं गांठ-श्रीहरि का स्मरण: चौदहवीं गांठ के साथ भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप का ध्यान किया जाता है और उनसे सुख-समृद्धि तथा कष्टों से मुक्ति की प्रार्थना की जाती है।
धार्मिक मान्यता है कि विधिपूर्वक अनंत भगवान की पूजा कर अनंत सूत्र धारण करने से व्यक्ति को भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन के कष्टों से रक्षा होती है। इस दिन श्रद्धापूर्वक श्रीहरि का पूजन करने से पापों से मुक्ति मिलने की भी मान्यता है।
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