शनि महाराज से सारी दुनिया डरती है और यह डर बेवजह नहीं है। आखिर शनि महाराज की दृष्टि ही ऐसी है कि जिसे टेढ़ी नजरों से देख लें उसके बुरे दिन शुरु हो जाते हैं।
शनि की टढ़ी दृष्टि इतनी खतरनाक और प्रभावशाली है जिससे मनुष्य तो क्या देवता भी नहीं बच पाते हैं। भगवान गणेश का गजमुख होना भी शनि की टेढ़ी दृष्टि का प्रकोप माना जाता है।
शनि की टेढ़ी दृष्टि और चरण के कारण रावण और मेघनाद का भी अंत हुआ। लेकिन शनि की दृष्टि शुरु से खतरनाक नहीं थी। शनि की दृष्टि को खतरनाक बनाने वाली स्वयं उनकी पत्नी मानी जाती हैं।
शनि को लगा पत्नी का शाप
शनि की व्रक दृष्टि के संदर्भ में जो कथा मिलती है उसके अनुसार शनि महाराज भगवान श्री कृष्ण के परम भक्त हैं। एक बार शनि महाराज कृष्ण भक्ति में लीन होकर तपस्या करने बैठ गए।
दूसरी ओर इनकी पत्नी के मन में संतान प्राप्ति की इच्छा जगी। ऋतु स्नान करने के बाद जब शनि महाराज की पत्नी इनके पास संतान प्राप्ति की इच्छा से आई तो शनि महाराज ने इस पर ध्यान नहीं दिया और तपस्या में लीन रहे।
शनि महाराज की अनदेखी से इनकी पत्नी का ऋतु काल बीत गया जिससे संतान की चाहत पूरी नहीं हो पाई। पति की अनदेखी से खुद को अपमानित समझकर शनि महाराज की पत्नी से शनि महाराज को शाप दे दिया कि अब से आपकी दृष्टि अशुभ होगी। आप जिसे भी देखेंगे उसका बुरा समय शुरु हो जाएगा।
तब पत्नी का शाप बन गया वरदान
पत्नी से शाप मिलने के बाद शनि महाराज बहुत दुखी हुए और हमेशा नजर झुकाए रहते। जब भगवान शिव को पता चला कि शनि महाराज को उनकी पत्नी ने शाप दे दिया है तो शिव जी ने इस शाप को वरदान में बदल दिया।
भगवान शिव ने शनि महाराज को तीनों लोकों का न्यायाधीश बना दिया। भगवान शिव ने कहा कि पत्नी से मिला शाप दूर नहीं होगा लेकिन तुम्हारी दृष्टि का बुरा प्रभाव उसे ही प्राप्त होगा जिस पर तुम्हारी वक्र दृष्टि होगी।
इसके बाद शनि महाराज तीनों लोकों में रहने वाले जीवों का न्याय करने लगे। शनि की वक्र दृष्टि अशुभ फलदायी होती लेकिन शनि की इस दृष्टि से बचने का एक सरल उपाय भी है।
ऐसे बचें शनि की वक्र दृष्टि से
शनि महाराज की दृष्टि को अशुभ बनाने वाली स्वयं इनकी पत्नी थी। लेकिन शाप के कारण ही शनि महाराज को तीनों लोकों का न्यायाधीश बनने का अवसर मिला इसलिए शनि महाराज अपनी पत्नी से बहुत स्नेह रखते हैं।
इसलिए जो व्यक्ति नियमित इनकी पत्नी के नामों का ध्यान करता है उस पर शनि की वक्र दृष्टि का प्रभाव नहीं पड़ता है। शनि महाराज की 8 पत्नियां हैं। इनके नामों का पाठ शनि के हर प्रकार के अशुभ प्रभाव को दूर करता है।
शनि पत्नियों के नाम का पाठ
ध्वजिनी, धामिनी चैव कंकाली कलहप्रिया
कलही कंटकी चैव ज्वालामुखी सुलोचना
शनि पत्न्याश्च नामानि प्रातरूत्थाय यः पठेत्।
तस्य शनैश्चरी पीड़ा कदापि न भविष्यति।