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शनिवार को बना शुभ संयोग, पाएं शनि कृपा का लाभ

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मृत्युलोक के दंडाधिकारी शनिदेव को प्रसन्न करने का पावनदिन शनिवारी अमावस्या 22 नवंबर को है। शनिवार को अमावस्या होने पर उसे शनैश्चरीय अमावस्या कहते हैं। इस दिन शनिदेव की अशुभ दृष्टि के कुप्रभाव से बचने के लिए उपाय करने चाहिए।
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पितृकार्य, श्राद्ध-तर्पण, पिंडदान करके पितरों को प्रसन्न करने का यह बेहतरीन अवसर है। किसी भी जातक की जन्मकुंडली में शनि एवं सूर्य एक साथ हों, सूर्य के साथ राहु या केतु की युति हो तो अशुभ प्रभावों से मुक्त कर सकता है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जीवों के शुभा-शुभ कर्मों के अनुसार शनिदेव अपनी महादशा, अंतर्दशा, प्रत्यांतरदशा, सूक्ष्मदशा, प्राणदशा, लौहपाद, अशुभ गोचर, साढ़ेसाती एवं ढैय्या के दौरान व्यक्ति को अपना शुभाशुभ फल प्रदान करते हैं।
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इस दिन शनिदेव को प्रसन्न करना चाहिए। इस दिन शनि को प्रसन्न करना बहुत आसान होता है।
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इस शनिवार ऐसे करें शनि महाराज को प्रसन्न

महाराजा दशरथ कृत शनिस्तोत्र' का पाठ करके और शनि की कोई भी वस्तु जैसे- काला तिल, लोहे की वस्तु, काला चना, कंबल, नीला फूल दान करना चाहिए।

'शनि नवाक्षरी मंत्र' अथवा 'कोणस्थ: पिंगलो बभ्रु: कृष्णौ रौद्रांतको यम:। सौरी: शनिश्चरो मंद: पिप्पलादेन संस्तुत: मंत्र का जप करेंगें तो शनिदेव की पूर्ण कृपा प्राप्त होगी।
 
अच्छे स्वास्थ्य के लिए शमी या पीपल का पूजन-अर्चन करें और कहें कि है श्रेष्ठ शमीवृक्ष, आप पवित्रों में श्रेष्ठ एवं शनि प्रिय भी हैं, आपमें सभी तरह के पापों को शमन करने का सामर्थ्य है।

हे शमीवृक्ष मेरे भी पापों का शमन करें। यदि आप इस दिन यात्रा कर रहे हों, या आपके पास समय का अभाव हो तो अपने अंतर्मन में शनिदेव का सर्वकालिक महानतम मंत्र 'ॐ नमो भगवते शनैश्चराय का जप करते रहें। अच्छे लोगों की संगति करें, अपराधपूर्ण एवं बेमानी-रिश्वत का अन्न खाने से परहेज करें।
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