वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया के रूप में मनाया जाता है। कई जगह इसे आखा तीज भी कहा जाता है। धार्मिक और सामाजिक दोनों की तरह से इस दिन का महत्तपूर्ण माना जाता है। अक्षय तृतीया को किया गया हर कार्य शुभ माना जाता है। इस दिन गंगा स्नान का भी महत्व है और भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। अक्षय तृतीया 28 अप्रैल को है, लेकिन इस बार इसका प्रभाव एक दिन ना होकर दो दिन रहेगा।
यह भी पढ़ें- मां लक्ष्मी को करना है प्रसन्न, इस समय करें अक्षय तृतीया की पूजा
वैदिक हिन्दु पंचांग के अनुसार तिथि निर्णय में उदय तिथि को महत्तपूर्ण माना गया है। मतलब सूर्योदय के समय जो तिथि होती है, उसका प्रभाव पूरे दिन रहता है। वास्तव में अक्षय तृतीया 28 अप्रैल को है, लेकिन सूर्यादय तिथि के अनुसार 29 अप्रैल भी इसका प्रभाव रहेगा। अक्षय तृतीया 28 अप्रैल शुक्रवार को सुबह 10 बजकर 29 मिनट शुरू होगी, जो अगले दिन यानी 29 अप्रैल शनिवार को सुबह 6 बजकर 56 मिनट तक रहेगी और इसका प्रभाव दिनभर रहेगा। दोनों ही दिन शुभ कार्य में महत्तपूर्ण है। अक्षय तृतीया पूजा का शुभ मुहर्त 28 अप्रैल को सुबह 10 : 29 से लेकर दोपहर 12:18 तक का हैं।
सोना खरीदना होता है शुभ
अक्षय तृतीया के दिन सोना खरीदना शुभ माना जाता है। इस दिन सोना खरीदने से घर में समृद्घि आती है। अगर आप इस दिन सोना नहीं खरीद पाते हैं तो कोई भी नई चीज को खरीदें। दान पुण्य करना भी इस दिन मायने रखता है।