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Akshaya Navami 2024 Date: 9 या 10 नवंबर, कब है अक्षय नवमी? नोट करें शुभ योग ,पूजा विधि और महत्व

Fri, 08 Nov 2024 01:17 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Akshay Navami 2024 Shubh Muhurat: अक्षय नवमी, जिसे आंवला नवमी भी कहा जाता है, का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ आंवले के वृक्ष की पूजा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। आँवला एक पवित्र फल माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार आंवले के पेड़ को साक्षात भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है।
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हर साल अक्षय नवमी कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है। इस शुभ दिन पर आंवले के पेड - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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Akshaya navami 2024 Date: हर साल अक्षय नवमी कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है। इस शुभ दिन पर आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है। आंवले के पेड़ के नीचे भोजन भी बनाया जाता है।  इस भोजन को सबसे पहले भगवान विष्णु और महादेव को अर्पित किया जाता है। सनातन धर्मग्रंथों से पता चलता है कि लक्ष्मी जी ने सबसे पहले आंवले के पेड़ की पूजा की थी। पेड़ के नीचे भोजन बनाकर उन्होंने भगवान विष्णु और महादेव को खिलाया। तब से हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की नवमी को अक्षय नवमी  मनाई जाती है। इस शुभ दिन पर आंवले के पेड़ की पूजा करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।  आइए जानते हैं शुभ मुहूर्त और शुभ  योग ।

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उदया तिथि के अनुसार  10 नवंबर को अक्षय नवमी मनाई जाएगी। - फोटो : amarujala
अक्षय नवमी तिथि 
कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि आरम्भ: 09 नवंबर, रात्रि 10: 45 मिनट पर 
कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि समाप्त: 10 नवंबर, रात्रि 09: 01 मिनट पर 
उदया तिथि के अनुसार  10 नवंबर को अक्षय नवमी मनाई जाएगी। इस दिन महिलाएं व्रत रख सकती हैं।

, नवमी तिथि तक दुर्लभ शिववास योग का संयोग बन रहा है। - फोटो : amar ujala
अक्षय नवमी शुभ योग 
ज्योतिषियों की मानें तो आंवला नवमी पर दुर्लभ ध्रुव योग का निर्माण हो रहा है। इस योग का संयोग 11 नवंबर  देर रात 01 बजकर 42 मिनट तक है। साधक प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद विधिपूर्वक आंवला पेड़ की पूजा कर सकते हैं। इस शुभ अवसर पर रवि योग का भी निर्माण हो रहा है। इसके अलावा, नवमी तिथि तक दुर्लभ शिववास योग का संयोग बन रहा है। इन योग में आंवला पेड़ की पूजा करने से सुख और सौभाग्य में वृद्धि होगी।


 

अक्षय नवमी के दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। - फोटो : amarujala
अक्षय नवमी की पूजा विधि 
  • प्रातः काल जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लें। 
  • इसके बाद आंवले के वृक्ष पर गंगाजल चढ़ाएं और रोली, चंदन, पुष्प आदि से श्रृंगार करें। 
  • इसके बाद आंवले के पेड़ के नीचे घी का दीया जलाएं। 
  • अब पेड़ की सात बार परिक्रमा करें।  
  • परिक्रमा के बाद आंवले के पेड़ के नीचे फल, मिठाई आदि का नैवेद्य अर्पित करें।  
  • अक्षय नवमी के दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है,  इसलिए उनकी भी पूजा अर्चना करें। 
  • मंत्र जाप के दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।  
  • संभव हो तो अपनी क्षमता अनुसार  किसी जरूरतमंद को भोजन, वस्त्र आदि दान कर सकते हैं।  
  • शाम को पूजा के बाद सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना करें और व्रत का पारण करें। 
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अक्षय नवमीपर आंवले पेड़ के नीचे बैठकर भगवान विष्णु की आराधना की जाती है। - फोटो : amar ujala
अक्षय नवमी की पूजा विधि 
धार्मिक ग्रंथों में आंवले को पवित्र माना गया है। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है। इस दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इस विशेष दिन पर, भक्त आंवले के पेड़ के नीचे बैठते हैं और भक्तिपूर्वक प्रार्थना करते हैं। अक्षय नवमी पर पितरों का  श्राद्ध और तर्पण भी किया जाता है। नई शुरुआत के लिए भी यह दिन अनुकूल माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, व्यवसाय में निवेश करने या नई योजनाएं शुरू करने के लिए यह अनुकूल समय है।
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