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Adhikmas: जानिए क्यों लगता है अधिकमास, सुख-समृद्धि पाने के लिए इसमें क्या करें और क्या न करें

Tue, 18 Jul 2023 12:02 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

अधिकमास को मलमास व पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है क्योंकि इसके स्वामी स्वयं भगवान श्रीहरि हैं। पुरुषोत्तम भगवान विष्णु का ही एक नाम है।
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अधिकमास के देवता भगवान विष्णु माने जाते हैं। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Adhikmas: आज से यानी 18 जुलाई, मंगलवार से अधिकमास या मलमास की शुरुआत हो गई है जो 16 अगस्त, बुधवार को समाप्त हो रहा है। पुरुषोत्तम मास का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। अधिकमास को मलमास व पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है क्योंकि इसके स्वामी स्वयं भगवान श्रीहरि हैं। पुरुषोत्तम भगवान विष्णु का ही एक नाम है। पौराणिक कथा के अनुसार अधिकमास सूर्य और चंद्र मास के बीच संतुलन बनाने के लिए प्रकट हुआ है। बचे हुए दिनों से बनकर तैयार हुआ इसलिए इस  मास का अधिपति बनने के लिए कोई देवता तैयार ना हुआ। ऐसे में भगवान शिव ने भगवान विष्णु से आग्रह किया कि वे ही इस मास के अधिपति बन जाएं।

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भगवान विष्णु ने इस आग्रह को स्वीकार कर लिया और इस मास को ब्रज क्षेत्र में बसाया। इस माह भगवान विष्णु की आराधना और भागवत कथा श्रवण करना बेहद पुण्यदायी माना गया है। मान्यता है कि इस मास किए गए धार्मिक कार्यों और पूजा पाठ का फल अधिक मिलता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। पुराणों की मान्यता के अनुसार पुरुषोत्तम मास के समय सभी तीर्थ ब्रज क्षेत्र में निवास करते हैं ,साथ ही ब्रजमंडल यानि भगवान श्रीकृष्ण की लीला स्थली मथुरा, वृंदावन, गोकुल, बरसाना तीर्थ की यात्रा करने का विशेष महत्व है।

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पुरुषोत्तम मास में क्या करें

  • इस मास में 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' द्वादश अक्षर मंत्र का जाप करना बहुत लाभदाई माना गया है। ऐसा माना जाता है कि अधिक मास में विष्णु मंत्र का जाप करने वाले साधकों को भगवान विष्णु स्वयं आशीर्वाद देते हैं, उनके पापों का शमन करते हैं और उनकी समस्त इच्छाएं पूरी करते हैं।  
  • भगवान विष्णु से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान,विशेष रूप से भागवत पाठ, रामायण पाठ, गीता पाठ और हरिवंश पुराण पाठ आदि करना या कराना बहुत शुभ माना गया है।
  • दक्षिणावृति शंख भगवान विष्णु को अति प्रिय है, इसे देवी लक्ष्मी का भाई भी माना गया है। अधिकमास में चावल द्वारा शंख का पूजन करने पर घर में लक्ष्मी का वास होता है,धन-धान्य की कमी नहीं होती।
  • श्रीहरि को तुलसी अतिप्रिय है। तुलसी मां लक्ष्मी का ही स्वरूप हैं। घर में सम्पन्नता एवं पारिवारिक क्लेशों को दूर करने के लिए प्रातः तुलसी में नियमित रूप से शुद्ध जल चढ़ाकर,शाम के समय गाय के घी का दीपक लगाना चाहिए। साथ ही तुलसी की 21 परिक्रमा करते हुए 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जप करने से सुख-शांति बनी रहती है।
  • पीपल में भगवान विष्णु का वास माना गया है। आर्थिक उन्नति एवं श्री विष्णु की कृपा पाने के लिए इस मास में रविवार को छोड़कर नित्यप्रति पीपल पर मीठा जल चढ़ाकर,विष्णु मंत्र का जाप करते हुए उसकी परिक्रमा करें।
  • इस बार सावन में पुरुषोत्तम मास जुड़ गया है। सावन माह में धर्म-कर्म करने व शिव पूजा करने से अक्षय पुण्य मिलता है। अधिक मास में भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा से शुभ फल की प्राप्ति होती है। अधिक मास के स्वामी भगवान विष्णु और सावन माह के स्वामी भगवान शिव हैं। ऐसे में सावन माह में पूजन से भगवान विष्णु और शिव दोनों का ही आशीर्वाद मिलता है।

क्या न करें

  • हिंदू धर्म में अधिक मास के दौरान शादी-विवाह, गृहप्रवेश, यज्ञोपवीत संस्कार आदि करना निषेध बताया गया है। 
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