धन
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विदुर नीति के अनुसार धन का बचाव तभी हो सकता है जब मानसिक,शारीरिक एवं वैचारिक संयम बरता जाए। मतलब धन को शौक पूरा करने या बिना आवश्यकता के भौतिक सुखो की पूर्ति के लिए धन का गलत तरह से व्यय नहीं करना चाहिए। धन तभी खर्च करना चाहिए जब आवश्यकता हो।
विदुर नीति के अनुसार अगर व्यक्ति धन धान्य से परिपूर्ण है तो उसे दान अवश्य करना चाहिए। यह जीवन में सबसे बड़ा पुण्य होता है। दान करने वाले व्यक्ति का मान-सम्मान बढ़ता है। धन को बढ़ाने के लिए दान करना भी आवश्यक है, नहीं तो धन रखे रखे ही बर्बाद हो जाता है।