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महाभारत युद्ध के गवाह हैं ये 10 स्थान, जानें कहां और किस हाल में हैं?

Fri, 22 Mar 2019 01:37 PM IST
Madhukar Mishra धर्म डेस्क, अमर उजाला
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10 amazing place of Mahabharat
पांचवा वेद माना जाने वाले महाभारत में कई प्रमुख स्थानों का वर्णन मिलता है। इनमें कई स्थान कहां और किस रूप में हैं, इसे जानकर आप हैरत में पड़ जाएंगे। महाभारत से जुड़े 10 प्राचीन स्थल का महत्व और उनकी मौजूदा लोकेशन जानने के लिए आगे की स्लाइड क्लिक करें — 
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Hastinapur
1. हस्तिनापुर
महाभारत से जुड़े 10 प्रमुख स्थानों में सबसे पहले बात करते हैं कुरु वंश के राजाओं की राजधानी हस्तिनापुर की। वर्तमान समय में यह स्थान मेरठ शहर के पास है। यह शहर देश की राजधानी दिल्ली से तकरीबन 90 किमी दूर उत्तर पूर्व में गंगा किनारे है। कालिदास के अभिज्ञान शाकुंतलम् का नायक दुष्यंत यहीं का शासक था। 
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takshila
2. तक्षशिला
महाभारत काल में तक्षशिला गंधार प्रदेश राजधानी थी। कौरवों की माता कुंती गंधार के राजा शुबल की पुत्री थीं। मान्यता है कि इसी स्थान पर पांडवों के वंशज जनमेजय ने अपने पिता परीक्षित की सांप काटने से मृत्यु के बाद क्रोधित होकर सर्पयज्ञ का अयोजन किया था, जिसमें हजारों नाग जलकर भष्म हो गए थे।तक्षशिला आचार्य चाणक्य और पाणिनी की कर्म भी रही है। तक्षशिला को विश्व का ‘प्रथम विश्वविद्यालय’ माना जाता है। एक समय यहां पर दुनिया के कोने-काने से लोग पढ़ने आया करते थे। 

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उज्जानिक
3. उज्जानिक
महाभारत काल से संबंध रखने वाला उज्जानिक नामक स्थान मौजूदा समय में उत्तराखंड के उधमसिंह नगर जिले के काशीपुर में है। मान्यता है कि उज्जानिक में ही गुरु द्रोणाचार्य ने कौरवों और पांडवों को शिक्षा दी थी। इस स्थान पर मौजूद द्रोणसागर झील के बारे में मान्यता है कि पांडवों ने गुरु दक्षिणा के तौर पर इस झील का निर्माण किया था।
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लाक्षागृह बरनावा - फोटो : अमर उजाला
4. लाक्षागृह
महाभारत काल में दुर्योधन द्वारा बनवाया गया लाक्षागृह मौजूदा समय स्थान बागपत में स्थित है। 'वारणावत' नाम का यह स्थान उन गांवों में से एक है, जिसकी मांग पांडव कौरवों से कर रहे थे। लेकिन दुर्योधन ने उन्हें सुई की नोक के बराबर जमीन नहीं देने की बात कही थी। दुर्योधन ने एक साजिश के तहत इस लाक्षागृह को लाख से बनवाया था, ताकि पांडव जब इस घर में रहने आएं तो चुपके से इसमें आग लगा कर उन्हें खत्म किया जा सके। लेकिन दुर्योधन की यह साजिश नहीं सफल हुई और पांडवों इस भवन से सकुशल बच निकले थे।
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Panchal
5. पांचाल
महाभारत में जिस पांचाल का जिक्र आता है वह 16 पौराणिक महाजनपदों में से एक है। प्राचीन काल में यह हिमालय और चंबा नदी के मध्य में बसा हुआ था जबकि मौजूदा समय में यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बरेली, बदायूं और फर्रूख़ाबाद ज़िलों से परिवृत्त है। महाभारत की कथा के अनुसार पांचाल नरेश द्रुपा की पुत्री द्रौपदी का विवाह पांडवों से हुआ था। 
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indraprastha
6.इंद्रप्रस्थ
महाभारत में जिस इंद्रप्रस्थ और खांडवप्रस्थ का जिक्र किया है वह वर्तमान में भारत राजधानी दिल्ली है। पांडवों से संबंधित यह स्थान यमुना किनारे स्थित था। महाभारत की कथा के अनुसार धृतराष्ट्र से आधा राज्य प्राप्त करने के पश्वात पांडवों ने इन्द्रप्रस्थ में अपनी राजधानी बनाई थी। जबकि कौरवों की राजधानी इससे तकरीबन 45 मील दूर हस्तिनापुर में ही रही। इस नगर को द्वारका के समकालीन माना जाता है। 

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ang pradesh
7. अंग प्रदेश 
महाभारत काल के अंग प्रदेश को बिहार राज्य के वर्तमान भागलपुर और मुंगेर ज़िलों का समवर्ती माना जाता है।  महाभारत काल में कुंती पुत्र कर्ण अंग प्रदेश के राजा थे। महाभारत की कथा के अनुसार एक बार आचार्य द्रोणाचार्य ने कौरव राजकुमारों के युद्ध कौशल के प्रदर्शन हेतु हस्तिनापुर में में एक प्रतियोगिता का आयोजन किया। जिसमें अर्जुन सबसे बड़े धनुर्धर के रूप में उभर कर सामने आए तो कर्ण ने असहमत होते हुए अर्जुन को युद्घ के लिए चुनौती दी। किन्तु कृपाचार्य ने कर्ण को यह कहते हुए रोक दिया कि वह कोई कोई राजकुमार नहीं हैं, इसलिए वह इस प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सकते। इसके पश्चात्भा दुर्योधन ने कर्ण को अंग देश का राजा घोषित कर दिया था।

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Mathura
8.मथुरा 
महाभारत काल में कंस की जिस मथुरा नगरी का जिक्र मिलता है, वह आज भी इसी नाम से उत्तर प्रदेश में मथुरा जिले के नाम से है। इस पावन नगरी में भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था। कंस के किले में कैद जिस जेल में भगवान कृष्ण ने जन्म लिया था, उस पावन जन्मभूमि का दर्शन करने के लिए आज भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। 

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Hanuman Bheem
9. जहां हनुमान जी से हुई भीम की मुलाकात 
महाभारतकाल में जब हनुमान जी और भीम की मुलाकात जिस स्थान पर हुई, आज वह उत्तराखंड में जोशीमंड से करीब 25 किमी दूरी पर हनुमान चट्टी के नाम से जानी जाती है। इसी पावन स्थान पर कभी हनुमान जी ने भीम को महाभारत युद्ध में विजयी होने का आशीर्वाद दिया था।
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kurukshetra
10. कुरुक्षेत्र 
कुरुक्षेत्र महाभारत युद्ध का वह स्थान है, जहां पर भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का दिव्य ज्ञान दिया था। वर्तमान में भी यह स्थान, पांच हजार साल पूर्व हुए महाभारत के उस विनाशकारी युद्ध की गवाही देता है। इस समय यह हरियाणा राज्य का प्रमुख जिला है। हिंदुओं का प्रमुख तीर्थस्थल कुरुक्षेत्र अम्बाला, यमुना नगर, करनाल और कैथल से घिरा हुआ है। 
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