फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जीवन में सफलता पानी है तो ये करना होगा

Fri, 23 May 2014 02:05 AM IST
रहमत अली
विज्ञापन
विज्ञापन
दो मित्र सज्जाद और करीम एक रेगिस्तान से गुजर रहे थे। पता नहीं, किसी बात पर दोनों में बहस छिड़ गई। बात इतनी बढ़ गई कि सज्जाद ने करीम को थप्पड़ जड़ दिया। करीम को दुःख तो हुआ, किंतु उसने कुछ कहा नहीं। वहां पड़ी बालू पर उसने लिख दिया, आज मेरे सबसे अजीज दोस्त ने मुझे थप्पड़ मारा।
विज्ञापन


यह लिखकर वह आगे बढ़ गया। सज्जाद भी साथ ही चल दिया। दोनों साथ चलते रहे, पर आपस में बोले नहीं। चलते-चलते उन्हें एक तालाब दिखाई दिया। करीम के मन में नहाने का ख्याल आया। वह पानी में उतरा।

सज्जाद भी उसी ख्याल से तालाब में उतरा। थोड़ा आगे बढ़ा, तो वह दलदल में धंसने लगा। अपने दोस्त को दलदल में फंसते देख करीम ने उसे बचा लिया। बाहर आकर सज्जाद ने एक पत्थर पर लिखा, मेरे मित्र ने मेरी जान बचाई।
विज्ञापन


जिस मित्र ने थप्पड़ मारा था, उसकी शिकायत करीम ने बालू पर लिखी थी। किंतु थप्पड़ मारने वाले मित्र सज्जाद ने जान बचाने की बात पत्थर पर लिखी। करीम से रहा नहीं गया। उसने पूछ ही लिया, तुमने जान बचाने की बात पत्थर पर लिखी। ऐसा क्यों?

सज्जाद करीम को बालू के उस ढेर के पास ले गया, जिस पर शिकायत लिखी थी। हवाओं ने वहां लिखी शिकायत मिटा दी थी। फिर वह करीम को उसी पत्थर के पास ले गया, जहां उसने अपने मित्र का आभार जताया था। सूरज की रोशनी में वह आभार दूर से दमक रहा था।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें