स्वामी रामतीर्थ ने जापान के एक सत्संग में प्रवचन शुरू करने से पहले हाथ में पानी से भरा एक गिलास पकड़ा और साधकों से पूछा, आपके हिसाब से गिलास का वजन कितना होगा?
साधकों में किसी ने पचास ग्राम, किसी ने सौ, तो किसी ने सवा सौ ग्राम वजन बताया। उनके उत्तर सुनकर स्वामी जी ने कहा, जब तक मैं इसका वजन न कर लूं, तब तक इसका सही वजन नहीं बता सकता। पर मेरा सवाल है कि यदि मैं इस गिलास को थोड़ी देर तक इसी तरह उठाकर पकड़े रहूं, तो क्या होगा?
पढ़ें,मांस और मदिरा ही नहीं, सावन में इन चीजों को खाने से भी लगता है पाप
कुछ नहीं, साधकों ने कहा। स्वामी रामतीर्थ ने फिर पूछा, अच्छा, अगर मैं इसे इसी तरह एक घंटे तक उठाए रहूं, तो क्या होगा?
आपका हाथ दर्द करने लगेगा, एक छात्र ने कहा। इस पर स्वामी रामतीर्थ बोले, तुम सही हो। अच्छा, अगर मैं इसे इसी तरह पूरे दिन उठाए रहूं, तो क्या होगा?
सुनकर लगभग सभी साधकों ने एक ही बात दोहराई, आपका हाथ सुन्न हो सकता है। आपकी पेशियों में भारी तनाव आ सकता है, लकवा मार सकता है। यह भी हो सकता है कि आपको अस्पताल जाना पड़े। दूर से कुछ छात्र इस बात पर हंस उठे। उनकी बातों पर ज्यादा गौर किए बिना स्वामी जी ने पूछा, बहुत अच्छा, पर इस दौरान गिलास का वजन बदला क्या?
पढ़ें, साप्ताहिक राशिफल: 14 से 20 जुलाई तक किस राशि पर सितारे मेहरबान
उत्तर आया, नहीं। स्वामी रामतीर्थ का अगला सवाल था, तब भला हाथ में दर्द और मांसपेशियों में तनाव क्यों आया?
छात्र अचरज में पड़ गए। फिर स्वामी रामतीर्थ ने पूछा, अब दर्द से निजात पाने के लिए मैं क्या करूं? गिलास को नीचे रख दीजिए! एक छात्र ने कहा। स्वामीजी ने कहा, बिलकुल सही!
वह बोले, जिंदगी भी कुछ इसी तरह होती है। समस्याएं आती हैं। उन्हें अपने दिमाग में रखेंगे, तो लगेगा कि सब कुछ ठीक है। उनके बारे में ज्यादा देर सोचिए और आपको पीड़ा होने लगेगी। और इन्हें और भी देर तक अपने दिमाग में रखिए, तो ये आपको थकाने लगेगी। और आप कुछ नहीं कर पाएंगे।