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आखिर तलवारबाजी सीखने के बाद मृत्यु से डर क्यों नहीं लगता है?

Mon, 22 Dec 2014 01:35 PM IST
योगी अनिर्वाण
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याग्यु ताजिमा बहुत बड़ा तलवारबाज था। जापान के बाहर भी उनकी ख्याति थी। वह शोगन तोकुगावा लेमित्सू के विद्यालय में शिक्षा देते थे। उस विद्यालय के निष्णात तलबारबाज भी याग्यु से सीखने के लिए उत्सुक रहते थे। पर कोई उनसे यह कहने की हिम्मत नहीं करता।
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एक दिन लेमित्सू के एक निजी रक्षक ने गुरु याग्यु से इस बारे में कहा। याग्यु ने कहा, तुम्हें देखकर लगता है कि तुम तलवारबाजी में पहले से ही सिद्धहस्त हो। तुमने कहां शिक्षा पाई है, यह जानना चाहता हूं, ताकि हम गुरु-शिष्य का संबंध स्थापित कर सकें।

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इस पर रक्षक ने कहा, मैंने किसी से भी तलवारबाजी की शिक्षा नहीं ली है। गुरु याग्यु बोले, क्या तुम मुझे अंधेरे में रखना चाहते हो? मैंने विद्यालय के अधिपति शोगन को सिखाया है। मेरी पारखी नजर धोखा नहीं खा सकती।
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लेकिन मैं सही कह रहा हूं कि मैं कुछ नहीं जानता, रक्षक ने कहा। बार-बार अस्वीकार करने से गुरु भी सोच में पड़ गए। अंततः वह बोले, कुछ तो ऐसा है, जिसमें तुम निष्णात हो, पर मुझे उसका पता नहीं चल पा रहा है। फिर वह रक्षक को तलवारबाजी सिखाने लगे।

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एक दिन रक्षक ने अनायास ही कहा कि एक ऐसी चीज है, जिसमें मैं निपुण हूं। जब मैं छोटा था, तब मुझे लगने लगा था कि समुराई होने के नाते मुझे मृत्यु से भयभीत नहीं होना है। कुछ वर्षों तक मुझे मृत्यु से भय लगता रहा, पर अंततः मैंने उस पर विजय प्राप्त कर ली। अब मृत्यु का विचार मुझे चिंता में नहीं डाल सकता।

हां, बिल्कुल वही!, गुरु याग्यु ने उत्साहपूर्वक कहा, मैं यही कह रहा था। मेरे निर्णय में कोई त्रुटि नहीं थी, क्योंकि तलवारबाजी का रहस्य इसी में है कि इसे सीखनेवाला व्यक्ति मृत्यु की चिंता से मुक्त हो जाए। तुम्हें प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं। तुम पहले से ही इसमें निपुण हो।
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