प्रसिद्ध संत स्वामी सहजानंद ने धर्म प्रचार के दौरान अनुभव किया कि सौराष्ट्र के ग्रामवासी अशिक्षा के कारण मांस-मदिरा के सेवन और जुआ खेलने जैसे दुर्गुणों में लिप्त हैं। उन्होंने अपने शिष्यों को घर-घर पहुंचकर ग्रामीणों के सुधार के लिए प्रयत्न करने की प्रेरणा दी।
स्वामी जी के आदेश से गुणातीतानंद तथा कृपानंद स्वामी अन्य साधुओं के साथ सौराष्ट्र के सावर गांव पहुंचे। उन्हें पता चला कि गांव का जमींदार धन के अहंकार में मदमस्त होकर ग्रामीणों का शोषण करता है। वह नहीं चाहता कि गांव में विद्यालय बने। उसे भय था कि किसानों के बच्चे यदि पढ़ने लगे, तो वे आगे चलकर अपना शोषण नहीं होने देंगे।
संतों की टोली का गांव के धर्मपरायण किसान मीठा साकरिया ने स्वागत किया। जमींदार को जब यह पता चला कि कुछ साधु नशे की लत छुड़ाने आए हैं, तो उसने लठैतों द्वारा साधुओं को आतंकित कर खदेड़ दिया।
साधुओं की मंडली ने एक वृक्ष के नीचे डेरा जमा लिया और जमींदार की बुद्धि की शुद्धि के लिए राम नाम का जाप करना शुरू किया। जमींदार को जब यह पता चला, तो वह वहां भी आ धमका। उसने स्वामी जी से पूछा, राम नाम का जाप आप किस उद्देश्य से कर रहे हैं?
उन्होंने उत्तर दिया, तुम्हें शैतान से मानव बनाने के लिए। हम यह भी चाहते हैं कि ईश्वर तुम्हें एक आदर्श संतान दें। यह सुनकर जमींदार पानी-पानी हो गया, फिर उसने पूरे गांव में शिक्षा और सदाचार की अलख जगाई।