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गुरु नानक के अनुसार ऐसे लोग यमलोक के वासी बनते हैं

Tue, 01 Apr 2014 01:51 PM IST
शिवकुमार गोयल
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गुरु नानकदेव जी कहा करते थे, किव सचियारा होइये किव कुडै तुटै पालि- यानी साधक को ऐसा सचियारा होना चाहिए कि वह हर क्षण सत्य का अनुसरण करता रहे। उसे ईश्वर के नाम के सुमिरन से मन के मैल को साफ करना चाहिए।
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वह कहते हैं, बेईमानी से प्राप्त पैसा विष की तरह मन और शरीर को रोगी बनाकर नाश कर डालता है। इसलिए सच्चाई से अर्जित आय में ही भलाई है।

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गुरु जी आगे कहते हैं, साचा साहिबु, साचु नाई भाखिया भाड अपारू- यानी वह स्वामी सत्य है, उसका बखान करने के भाव अनगिनत हैं, यह जान लो कि वह सत्य रूप प्रभु ही सबकुछ है। सत्कर्म करने की प्रेरणा देते हुए वह कहते हैं, कर्म ही उत्थान-पतन का कारण है।

यदि सत्कर्म करोगे, तो अच्छे कहलाओगे। दुष्कर्म करोगे, तो प्रभु व समाज-दोनों की नजरों में गिर जाओगे। आंतरिक पवित्रता पर बल देते हुए गुरु जी कहते हैं, अपवित्रता तो ज्ञान व ईश्वर के नाम से ही दूर हो सकती है। मन की अपवित्रता लोभ है।
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पराये धन और परायी स्त्री के प्रति आकर्षण आंख का अशौच है। परनिंदा सुनना, गंदी बातें सुनना कान का अशौच है। हृदय को अपवित्र विचारों से दूर रखना चाहिए। कुसंग से मन मलिन बनता है और जीव अकारण यमलोक का वासी बनता है। वही सच्चा भक्त है, जो सदाचार का जीवन बिताते हुए भी भगवान के नाम का हर क्षण सुमिरन करता रहे।
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