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हजामत बनवाने जाएं तो नाई की इस बात का ध्यान रखें

Wed, 03 Sep 2014 12:32 PM IST
स्वामी शरणानंद
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उन दिनों फ्रांस में विद्रोही काफी उत्पात मचा रहे थे। सरकार अपने तरीकों से उनसे निपटने में जुटी थी। काफी हद तक सेना ने विद्रोह को कुचल भी दिया था, फिर भी कुछ शहरों में स्थिति खराब थी। इन्हीं में से एक शहर था, लिथोस। लिथोस में उपद्रव पर काबू पाने के लिए जनरल कास्तलेन को भेजा गया। कास्तलेन बागियों से सख्ती से पेश आने के लिए जाने जाते थे। इसलिए विद्रोहियों में उनका खौफ था और वे उससे चिढ़ते भी थे।
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इन्हीं विद्रोहियों में एक नाई भी था, जो कहता रहता था कि जनरल मेरे सामने आ जाए, तो मैं उस्तरे से उसका सफाया कर दूं। जब कास्तलेन ने यह बात सुनी, तो एक दिन वह अकेले ही उसकी दुकान पर पहुंच गए। जनरल ने उससे हजामत बनाने के लिए कहा। नाई जनरल को पहचानता था। उसे अपनी दुकान पर देखकर घबरा गया। मगर उसने हिम्मत नहीं खोई। वह सधे हाथों से जनरल की हजामत बनाता रहा। बीच में उसके मन में विचार आया कि उस्तरे से जनरल का काम तमाम कर दे, मगर उसने खुद पर काबू रखा।

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काम पूरा हुआ, तो जनरल कास्तलेन ने उसे पैसे दिए। साथ ही यह भी कहा, मैंने तुम्हें अपना गला काटने का पूरा मौका दिया। तुम्हारे हाथ में उस्तरा था, मगर तुम मौके का फायदा नहीं उठा सके। नाई चुप रहा। जनरल ने पूछा, क्या तुम मुझे पहचानते नहीं हो। अब नाई ने चुप्पी तोड़ी और कहा, मैं आपको अच्छी तरह जानता हूं जनरस कास्तलेन। मेरे मन में भी आपको खत्म करने का विचार आया था। मगर ऐसा करके मैं अपने पेशे के साथ धोखा नहीं कर सकता था। मेरा उस्तरा किसी की हजामत बनाने के लिए है, जान लेने के लिए नहीं। आप हथियारबंद होते, तो मैं सोचता, लेकिन अभी आप मेरे ग्राहक हैं।
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