विदुला घर लौटी, तो दासी ने बताया कि तीन भिक्षु उनके द्वार पर प्रतीक्षा कर रहे हैं। विदुला ने उन्हें आमंत्रित किया, कहा, आप भीतर आइए और भोजन करिए। एक भिक्षु ने, जो आयु और अनुभव में बाकी दोनों से बड़ा लग रहा था, विदुला से पूछा, क्या तुम्हारे पति घर पर हैं? विदुला ने कहा, नहीं। यह सुनकर उस भिक्षु ने कहा, हम तभी भीतर आएंगे, जब वह घर पर हों। और वे वहीं रुक गए।
पढ़ें, 2015 का वार्षिक राशिफल
विदुला ने कोई आग्रह नहीं किया। उसे पता था कि कितना ही आग्रह करें, भिक्षु इस नियम की अवज्ञा कर घर के भीतर नहीं आएंगे। शाम के वक्त पति घर लौटे, तो विदुला ने उन्हें यह सब बताया। उन्होंने विदुला से उन्हें आदर सहित बुलाने को कहा। विदुला उन भिक्षुओं को बुलाने गई। मगर भिक्षुओं ने कहा, हम सब किसी भी घर में एक साथ नहीं जाते। घर के बाहर भिक्षुओं का यह आग्रह सुनकर विदुला के पति बाहर आ गए। परिचय के आदान-प्रदान में वरिष्ठ संत ने कहा, मेरा नाम संपद् है। दूसरे भिक्षु का नाम है यश और तीसरा है स्नेह।
पढ़ें, साल के पहले तीन महीने में जेब रह सकती है हरी-भरी?
विदुला और उसके पति ने परामर्श किया। पति ने कहा, तीनों में से किसी एक को ही आना है, तो हमें संपद् को आमंत्रित करना चाहिए। उसके आशीष से हमारा घर खुशियों से भर जाएगा। फिर कहा कि यश को बुलाना चाहिए। फिर विचार किया कि स्नेह सबसे छोटा है। उसे ही आमंत्रित करना चाहिए। उन्होंने स्नेह को आमंत्रित किया। वह घर की ओर बढ़ने लगे। शेष दोनों भिक्षु भी पीछे चलने लगे।
विदुला ने पूछा, मैंने तो सिर्फ स्नेह को आमंत्रित किया है। पीछे आ रहे भिक्षु संपद् ने कहा, यदि आपने मुझे और यश में से किसी एक को बुलाया होता, तो केवल वही भीतर जाता। आपने स्नेह को आमंत्रित किया है। वह कभी अकेला नहीं जाता।