इटली के एक प्रमुख शहर गिएरुपे में बारूद के एक कारखाने में फिनोज पी वेग नामक फोरमैन काम करता था। उस कारखाने में बारूद के मिश्रण से धातुओं की परतों में छेद करने का काम होता था। फिनोज पी वेग के साथ एक विचित्र दुर्घटना घटी। हुआ यह कि वह सुराख करने के एक बरमे के पास काम कर रहा था।
अचानक न जाने क्या गड़बड़ी आई कि मशीन से एक भारी धमाके के साथ बरमा निकल कर उचटा और उसके मस्तिष्क को बेधता हुआ निकल गया। आस-पास के कर्मचारियों को लगा कि वेग के परखच्चे उड़ गए हैं।
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वह झटके से नीचे गिरा और ऐंठ गया। फिर भी आश्चर्य था कि उसमें जान बाकी थी। उसे कारखाने से करीब एक मील दूर स्थित अस्पताल में पहुंचाया गया। अस्पताल के प्रमुख चिकित्सकों ने उसका परीक्षण किया और मुख्य चिकित्साधिकारी इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि घायल को किसी भी हालत में बचाया नहीं जा सकेगा। फिर भी चिकित्सकों ने साधारण मरहम पट्टी कर दी। लेकिन चमत्कार-सा हुआ कि उसी दिन वेग की बेहोशी टूटी।
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उसका खून बहना बंद नहीं हुआ था, फिर भी रात दस बजे वह बातें करने लगा। इसके बाद तो डॉक्टरों में भी वेग के जीवित बच जाने की आशा जगी। वह तेजी से अच्छा होने लगा और तीन माह तक अस्पताल में रहने के बाद पूरी तरह स्वस्थ होकर अस्पताल से घर आ गया।
अस्पताल के अधिकारियों ने जो रिपोर्ट तैयार की, वह मूर्धन्य चिकित्सकों के लिए आज भी अध्ययन और आश्चर्य का विषय बनी हुई है। वेग की टूटी हुई खोपड़ी के अस्थि खंड तथा उससे संबंधित पदार्थ व कागजात हार्वर्ड मेडिकल कॉलेज, ब्रुकलिन के संग्रहालय में सुरक्षित रखे हुए हैं।