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ईश्वर की बेहतरीन रचना आखिर क्यों कहा गया इसे

Fri, 06 Jun 2014 09:00 AM IST
जेन कथा
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एक प्रशासक, एक कवि, एक चित्रकार और एक आलोचक एक ऊंट पर बैठकर रेगिस्तान से गुजर रहे थे। रास्ते में एक रात यों ही वक्त बिताने के लिए उन्होंने सोचा कि वे अपने-अपने हिसाब से ऊंट का वर्णन करें। प्रशासक तंबू में गया और उसने दस मिनट में ऊंट के महत्व को दर्शाने वाला एक व्यवस्थित और वस्तुनिष्ठ निबंध लिख दिया।
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कवि ने भी लगभग दस मिनट में ही अनुपम छंदों में यह लिख दिया कि ऊंट किस प्रकार एक उत्कृष्ट प्राणी है। चित्रकार भी कहां पीछे रहने वाला था! उसने अपनी तूलिका उठाई और कुछ सधे हुए स्ट्रोक्स लगाकर ऊंट की बेहतरीन छवि की रचना कर दी।

अब आलोचक की बारी थी। वह कागज-कलम लेकर तंबू में चला गया। उसे भीतर गए दो घंटे बीत गए। बाहर बैठे तीनों लोग बेहद उकता चुके थे। वे आलोचक के जल्दी बाहर आने की राह देखते-देखते थकने लगे थे।
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काफी देर बाद आखिरकार आलोचक बाहर आया और बोला, मैंने इस जानवर के कुछ नुक्स खोज ही लिए। इसकी चाल बड़ी बेढब है। यह जरा भी आरामदेह नहीं है और यह बदसूरत भी है। इतना कहते हुए उसने कागज का एक पुलिंदा उन लोगों को थमा दिया।

उस पर लिखा था, ऊंट ईश्वर की रचना है। हमारी समझ उसकी समझ से बेहतर नहीं हो सकती। इसलिए वह जैसा भी हो, हमारे लिए अच्छा भले ही न हो, पर ऊपर वाले की नायाब रचना है।
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