एक अमीर आदमी अपने काफिले के साथ रेगिस्तान से गुजर रहा था। कई दास-दासी, चौपायों पर लदे अनाज, मेवे और हीरे-जवाहरात के अलावा उसके पास और भी बहुत कुछ था। रोज की तरह एक शाम उसने अपने गुलामों से किसी बढ़िया जगह पर पानी, मौसम वगैरह की पड़ताल करके डेरा डालने को कहा। ऐसा ही किया गया।
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शाम गहराने के साथ ही उसके पास एक यमदूत आया। अमीर उसे पहचान नहीं सका और उसने उसे पानी पिलाया, न्योता देने के साथ रात उस डेरे में ही बिताने के लिए कहा। इस आवभगत के बाद यमदूत ने कहा, मैं मृत्युलोक से तुम्हारे प्राण लेने आया हूं। यह कहकर वह रुका और फिर बोला, लेकिन तुम अच्छे आदमी लगते हो, इसलिए मैं तुम्हें पांच मिनट के लिए नियति की पुस्तक दे सकता हूं। इतने समय में तुम जो कुछ बदलना चाहो, बदल सकते हो।
यमदूत ने उसे नियति की पुस्तक दे दी। पुस्तक के पन्ने पलटते हुए उस आदमी ने अपने पड़ोसियों के जीवन के बारे में देखा कि उनके लिए क्या-क्या नियत किया गया है। उनके बारे में लिखी नियामतों की झलकियां देखकर वह ईर्ष्या और क्रोध से भर उठा। उनका खुशहाल जीवन उसे सुहा नहीं रहा था। नियति की किताब देखकर वह बोला, ये लोग इतने अच्छे जीवन के हकदार नहीं हैं। इन्हें बदलना होगा।
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यह कहकर उसने कलम उठाई और पड़ोसियों का भावी जीवन पूरा बिगाड़ दिया। अंत में वह अपने जीवन के पन्नों तक भी पहुंचा। लेकिन अगले ही पल उसे मौत आती दिखी। इससे पहले कि वह अपने जीवन में कोई फेरबदल कर पाता, मौत ने उसे आगोश में ले लिया। अपने जीवन के पन्नों तक पहुंचते-पहुंचते उसे मिले पांच मिनट पूरे हो चुके थे।