गहरी नींद में आपका बोध भी लुप्त हो जाता है, लेकिन जब तक आपके स्वप्न चल रहे हैं, तब तक मन बहुत चंचल है। ऋषियों ने कहा है कि जिस दिन सारे स्वप्न विलीन हो जाएं, नींद स्वप्न रहित हो जाए, तब जानना कि तुम मन के घेरे से बाहर आ गए। आप सोएं और आपको एक भी स्वप्न न आए, वह है गहरी नींद। लेकिन, होता यह है कि स्वप्न आते हैं, पर नींद बीच में कभी कुछेक मिनटों तक ही आती है।
सपने ही सपने चलते हैं। सपने इसलिए चल रहे हैं, क्योंकि मन चल रहा है। अब मन क्यों चल रहा है? क्योंकि मन चंचल है। मन चंचल क्यों है? क्योंकि तुम ठीक से विचार नहीं करते, ठीक से ध्यान नहीं करते, अपनी सद्बुद्धि का उपयोग नहीं करते। नींद पर शोधकर के एक रिकार्ड तैयार करना चाहिए कि आज सुबह जगा, तो रात को कितने स्वप्न आए। नींद को गहरा करने के उपाय करें। नींद की गुणवत्ता की जांच करें।
आप पाएंगे कि जितनी आपकी नींद अच्छी होती जाएगी, उतना आपका संबंध, आपके साक्षी भाव से होता जाएगा। आपकी आत्म जागृत से होगा, आपके आत्मचिंतन से होगा। जो आदमी जाग्रत-काल में सहज और शांत भाव में होगा, उसकी नींद भी अच्छी होगी, उसके स्वप्न भी कम होंगे और हमारे जीवन की गुणवत्ता है, वह बेहतर होती जाएगी। उसमें निरंतर सुधार होता जाएगा।
अमर उजाला के कल्पवृक्ष पन्ने से साभार